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अहंकार त्याग दो

दोस्तों अगर किसी इंसान के अंदर अहंकार होता है तो वह अंहकार उस इंसान को अंदर से खोखला बना देता है, और एक दिन उस इंसान की मृत्यु का कारण भी बन जाता है। अंहकार में आकर इंसान अपने आपको समझदार समझने लगता है, और अपना सब कुछ गवा देता है। ये ही बात आपको अच्छे तरीके से समझाने के लिए मैं आपको एक कहानी सुनाता हूँ।

एक बार एक महात्मा एक राज्य से गुजर रहा था। उस महात्मा ने सोचा राजा से मिलता चलु। वह राजा के पास गया। राजा ने उसका खूब आदर सत्कार किया। वह महात्मा कुछ दिनों के लिए राजा के पास रुक गया। राजा ने उस महात्मा से बहुत से सवाल किये।

उस महात्मा ने बड़े ही विस्तार से राजा के सभी सवालों का जवाब दिया।राजा महात्मा से मिलकर बहुत प्रश्न हुआ और एक दिन उस महात्मा के जाने का समय हो गया। राजा ने महात्मा से कहा की हे महात्मा मैं आपको उपहार स्वरूप कुछ देने की इच्छा रखता हूँ। आप मेरे खजाने में से कुछ भी ले सकते है।

महात्मा ने राजा से कहा की तुम खजाने के रक्षक हो। खजाना तुम्हारी सम्पत्ति नहीं है। यह तो राज्य की सम्पत्ति है। राजा ने कहा महल तो मेरा ही है। आप महल ले लीजिए। महात्मा ने कहा नहीं यह महल भी तुम्हारा नहीं है। इस महल पर भी प्रजा का ही अधिकार है

राजा ने महात्मा से कहा हे महात्मा आप ही बताइये की मेरे पास ऐसा क्या है। जिस पर मेरा अधिकार हो और मैं आपको दे सकूँ। महात्मा ने कहा की अगर तुम देने की ही इच्छा रखते हो तो तुम मुझे अपना अहंकार दे दो। यह सुनकर राजा उस महात्मा की बात को समझ गया।

 इंसान के अंदर अहंकार जन्म ले लेता है। वह इंसान अपने आपको श्रेष्ठ और समझदार समझने लगता है। लेकिन वह नहीं जानता की उसका अंहकार उसे अंदर से धीरे धीरे खोखला बना देता है। इसी अंहकार के कारण एक दिन वो अपना सब कुछ गवाँ देता है। अगर आपके अंदर भी अहंकार है तो उसे आज ही त्याग दो नहीं तो भविष्य में आपको पछताना पड़ सकता है।

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