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कोरोना : गलती सरकार ने की सज़ा जनता भुगत रही है

आलोक गौड़

गुनाह पासपोर्ट वालों का था, दर बदर राशन कार्ड वाले हो गए। सुनने में भले ही यह बात कितनी भी अजीब क्यों न लगे मगर पूरी तरह से सच ऐ। जिस वैश्विक महामारी कोरोना वायरस के संकट से आज पूरा देश जूझ रहा है, उसे देश में लाने के लिए अगर कोई जिम्मेदार है तो वह हमारी अपनी सरकार। जी हां मोदी सरकार की गलती का खामियाजा देश की जनता को भुगतना पड़ रहा है।
कोरोना वायरस की बीमारी सबसे पहले चीन के वुहान प्रांत में फैली थी। कुछ समय के भीतर ही यह दुनिया के 150 से भी ज्यादा देशों में फैला गई। जिन देशों में यह महामारी फैली। उनकी सरकारों ने एहतियात के तौर पर अपने देश में अंतरराष्ट्रीय हवाई सेवाएं बंद कर दी थीं। जिन देशों में शुरू में कोरोना वायरस की बीमारी फैली और इसकी वजह से उन्होंने ने अपने यहां अंतरराष्ट्रीय हवाई सेवाएं बंद कर दी थीं, उनमें बड़ी संख्या में भारतीय नागरिक भी थे।मोदी सरकार ने कोरोना वायरस की चपेट में आए देशों से भारतीय नागरिकों को निकालने के लिए अपने विमान भेज कर उनके जरिए उन्हें बचा लिया। सरकार की इस नीति को देखते हुए उन सभी देशों में फंसे भारतीय नागरिकों ने भी मोदी सरकार से उन्हें वहां से बाहर निकालने की गुहार लगाई, जहां इस महामारी से निपटने के लिए लाक डाउन लागू किया गया था या फिर हवाई उड़ान पर प्रतिबंध लगा दिया गया था।

सरकार ने भी अपनी ओर से उदारता दिखाते हुए दूसरे देशों से अपने नागरिकों को निकालने में किसी तरह की कोई कोताही नहीं बरती। हालांकि इसमें कुछ ग़लत भी नहीं था। सरकार की ओर से जो भारी चूक या लापरवाही बरती गई तो वह यह थी कि उसने रेस्क्यू किए गए सभी नागरिकों की जांच करवाने की कोई व्यवस्था नहीं की। इसके भी दो प्रमुख कारण बताए जा रहे हैं। पहला तो यह कि देश में इतनी बड़ी संख्या में संदिग्धों की जांच कराने की कोई व्यवस्था नहीं थी। कोरोना वायरस की जांच की सुविधा केवल चुनिंदा सरकारी अस्पतालों में उपलब्ध थी।
दरअसल मोदी सरकार ने शुरू में न कोरोना वायरस की बीमारी के खतरे को गंभीरता से लिया और न उससे निपटने में किसी तरह की तत्परता ही दिखाई। जिसका खामियाजा आज भारत की 130 करोड़ जनता को भुगतना पड़ रहा है।सरकार की लापरवाही का सबूत इससे भी मिलता है कि देश में कोरोना वायरस का पहला मामला तीन फरवरी को सामने आया था। तब सरकार ने इससे निपटने के लिए न कोई नीति ही बनाई और न ही लोगों को इस वायरस की चपेट में बचाने की दिशा में ठोस कदम ही उठाए।इतना ही नहीं कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने भी जनवरी माह से अपने ट्वीटर अकाउंट के जरिए और प्रधानमंत्री मोदी को पत्र लिखकर भी देश में कोरोना वायरस की महामारी फैलने की आशंका से अवगत कराते हुए आवश्यक कदम उठाने का आग्रह किया था। मगर सरकार ने उस कोई ध्यान नहीं दिया। उलटे सरकार और भाजपा नेताओं ने राहुल गांधी की खिल्ली उड़ाते हुए उन पर कल्पना के हवाई घोड़े पर सवार होकर जनता को गुमराह करने का आरोप लगाया था।

बाद में राहुल गांधी की आशंका पूरी तरह से सही साबित हुई।इतना ही जब देश में कोरोना वायरस से संक्रमित मरीजों की संख्या बढ़ रही थी तब भी सरकार ने इस महामारी से निपटने के लिए कोई कदम नहीं उठाए। क्योंकि उस समय तो प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी सहित सरकार के सभी मंत्रियों का ध्यान मध्य प्रदेश में कांग्रेस की निर्वाचित सरकार को गिराना कर राज्य की सत्ता हथियाने पर लगा हुआ था।
खैर मध्य प्रदेश में कांग्रेस के विधायकों को खरीद कर वहां के उपमुख्यमंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया को अपनी पार्टी में शामिल कराने में तो प्रधानमंत्री मोदी और उनके सिपहसालार सफल हो गए। मगर इस बीच देश में कोरोना वायरस की स्थिति बिगड़ती चली गई।
इस स्थिति से निपटने के लिए ठोस एवं कारगर नीति बना कर उस पर अमल करने के बजाय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने आनन-फानन में देश में लाक डाउन लागू करने की घोषणा कर दी। उन्होंने यह घोषणा करने से पहले यह भी नहीं सोचा कि 130 करोड़ से भी ज्यादा जनसंख्या वाले देश में इसे लागू करने की राह में कौन-कौन सी कठिनाइयां आएंगी और न ही यह सोचा कि इससे कितनी बड़ी संख्या में लोग बेरोजगारी और भुखमरी का शिकार हो जाएंगे। उन्होंने यह भी नहीं सोचा कि बेरोजगार वह बेघर बार लोग जब व्यापक पैमाने पर महानगर और शहरों से गांव देहात की ओर पलायन करेंगे तो कोरोना वायरस का संकमण कितनी तेजी से फैलेगा।
यही नहीं प्रधानमंत्री मोदी ने लाक डाउन लागू करने से पहले न तो गरीब मजबूर तबके को राहत देने की दिशा में ठोस कदम उठाए और न ही आम आदमी के लिए रोज़मर्रा के लिए आवश्यक वस्तुओं की सप्लाई बनाए रखने की व्यवस्था ही की। यह उसी का नतीजा है कि आज देश में हर तै अफ़रा-तफ़री का माहौल है। करोड़ों लोग बेरोजगार हो गए हैं। लोगों को उनकी जरूरत का सामान नहीं मिल पा रहा है। सभी चीजों के दाम बढ़ गए हैं। लाखों लोग जान हथेली पर लेकर महानगरों और शहरों से गांव देहात की ओर पलायन कर रहे हैं।
ऐसा लगता है कि मोदी सरकार की लापरवाही और ग़लत नीतियों वाले जल्दबाजी में लिए गए फैसलों की देशवासियों को बहुत बड़ी कीमत चुकानी पड़ सकती है।

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