देश में कोरोना वायरस के मा" />
Hindi News, हिंदी समाचार, Samachar, Breaking News, Latest Khabar
National Thoughts
National Thoughts
Breaking News Editorial

कोरोना वायरस : देश में कोरोना वायरस के मामले बेहद तेजी से बढ़ रहें है

  • देश में कोरोना वायरस के मामले बेहद तेजी से बढ़ रहें हैं।
  • लंबे समय तक लाक डाउन झेलने के लिए तैयार रहें।
  • सरकार इस भयानक संकट से निपटने के लिए उपाय करने में पूरी तरह से नाकाम रही।
अमेरिका सहित यूरोप और अन्य देशों की तुलना में भारत में कोरोना वायरस से संक्रमित मरीजों की संख्या काफी कम देखकर अगर आप यह सोच रहे हैं कि  हमारे देश में कोरोना वायरस का प्रकोप काफी धीमी गति से बढ़ रहा है तो यह आपकी खुशफहमी के सिवाय और कुछ भी नहीं है। क्योंकि जहां अमेरिका में रोजाना कोरोना वायरस के संदिग्धों की जांच की जा रही है और उसने इस क्षमता को शीघ्र ही बढ़ाकर लिए दो लाख प्रतिदिन करने का एलान किया है।
वहीं जर्मनी सहित ज्यादातर देशों में लाखों संदिग्धों की जांच हो चुकी है। जबकि भारत में कोरोना वायरस की चपेट में आए रोजाना केवल एक हजार लोगों की जांच करने की व्यवस्था है और उसमें से भी महज तीस फीसदी क्षमता का ही उपयोग हो पा रहा है। इससे यह अंदाजा आसानी से लगाया जा सकता है कि जांच का काम कितने दिनों में पूरा होगा और कोरोना वायरस से संक्रमित मरीजों की संख्या कितनी होगी वह कितने लोग इसका शिकार हो कर मौत के मुंह में समा जाएंगे।
 मोदी सरकार अभी यह कह रही है कि लाक डाउन की अवधि 14 अप्रैल के बाद आगे नहीं बढ़ेगी मगर जिस तरह से कोरोना वायरस से संक्रमित मरीजों की संख्या बढ़ रही है सरकार से लेकर समाजिक स्तर पर लापरवाही के घटनाएं सामने आ रही हैं। उससे एक बात तो निश्चित तौर पर कही जा सकती है कि ऐसे संकेत देश और देशवासियों दोनों के लिए ही ठीक नहीं है।
अस्पतालों में मरीजों के इलाज के लिए विशेष व्यवस्था या जीवन रक्षक वेंटिलेटर उपलब्ध होने की बात तो इस ख़तरनाक बीमारी के मरीजों का इलाज करने वाले डॉक्टर और नर्स के पास सुरक्षा के उपकरण तक नहीं है।जय। ऐसी स्थिति में यह कल्पना करते हुए भी डर लगता है कि वे किस खतरनाक हालात में लोगों का उपचार कर रहे हैं।अपनी नाकामी छुपाने के लिए हर बार कांग्रेस शासन को जिम्मेदार ठहराने वाली मोदी सरकार के पास इस सवाल का क्या जवाब के अपने छह साल के कार्यकाल के दौरान उसने इन कमियों को दूर कर देश में स्वास्थ सेवाओं का ढांचा तैयार करने की दिशा में ठोस कदम क्यूं नहीं उठाए।
आलोक गौड़

Related posts