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गोबिंद भोग चावल से लगेगा रामलला को भोग, जाने क्या है गोविन्द भोग चावल 

नेशनल थॉट्स डेस्क।  देश-विदेश में मशहूर बिहार के प्रसिद्ध गोविंद भोग चावल से अयोध्या में रामलला का भोग बनेगा वही भगवान के अलावा भक्तों के लिए भोजन प्रसाद भी गोविंद भोग चावल से ही बनेगा। ऐसे में आइये एक नजर डालते है क्या है गोविन्द भोग चावल, कैसे की जाती है इसकी पैदावार, देश के किन-किन प्रांतो में उगाई जाती है गोबिंद भोग चावल, आखिरकार गोविन्द भोग चावल का वास्तविक नाम क्या है, कैसे पड़ा गोविन्द भोग नाम ?
ऑर्गेनिक गोविंदा भोग चावल के कई अलग-अलग नाम हैं, जिनमें गोबिंदो भोग, भोग चावल, गोबिंदभोग चावल शामिल हैं। यह एक छोटा अनाज, सफेद, सुगंधित, चिपचिपा चावल होता है जिसमें मीठा मक्खन होता है। प्रमाणित यूएसडीए कार्बनिक उत्पाद के रूप में, जैविक गोविंदा भोग चावल कीटनाशकों और एंटीबायोटिक जैसे सिंथेटिक सामग्री से बचने के दौरान पर्यावरण को संरक्षित करने वाले तरीकों का उपयोग करके उगाया जाता है। यह ऑर्गेनिक गोविंदा भोग राइस एक जीएमओ-मुक्त भोजन है, जिसका अर्थ है कि जेनेटिक इंजीनियरिंग का उपयोग करके इसके डीएनए में कोई विशेष परिवर्तन नहीं किया गया था। इसके अतिरिक्त, यह कार्बनिक भोग चावल एक शाकाहारी भोजन है, जिसका अर्थ है कि यह अंडे, समुद्री भोजन, मांस, डेयरी, शहद और मुर्गी पालन सहित सभी प्रकार के पशु उत्पादों को शामिल नहीं करता है।
वही एक मान्यता के अनुसार कैमूर में मुंडेश्वरी माता के मंदिर के नीचे स्थित माेकरी गांव का गोविंद भोग चावल सबसे सुगंधित माना जाता है। लाेगाें की मान्यता है कि पहाड़ पर माता मुंडेश्वरी का मंदिर स्थित है। हर साल बारिश का पानी पहाड़ से माता के स्थान काे स्पर्श करते हुए माेकरी गांव में गिरता है। उस पानी से ही पूरे गांव और आसपास के कुछ गांवाें के खेत सिंचित हाेते हैं। इसी वजह से माेकरी में पैदा होने वाला चावल ज्यादा खुशबूदार हाेता है। कैमूर इलाके में कतरनी चावल भी नामी है। कहते हैं कि कैमूर के गाेविंद भाेग और कतरनी चावल कभी ईस्ट इंडिया कंपनी से जुड़े व्यापारी लंदन भेजते थे। कई देशाें में इस चावल की काफी मांग थी।

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