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चाय बेचने वाले ने सैकड़ों ज़िन्दगी को दिया नायब तोहफा

चाय की दुकान पर चाय की चुस्कियों के साथ देश की राजनीतिक और आर्थिक व्यवस्था का ज़िक्र करना कोई बड़ी बात नहीं है । चाय की अंतिम चुस्कियों के साथ हम यहीं निष्कर्ष निकालते है कि देश कई गंभीर समस्याओं से जूझ रहा है। हर कोई समाज और देश बदलने की बात करता है, लेकिन एक हकीक़त ये भी है कि लोग समस्याओं की तह तक नहीं जाना चाहते। वहीं कुछ लोग ऐसे भी हैं, जो बगैर ढिंढ़ोरा पीटे लोगों की मदद करते हैं। ओडिशा के कटक में चाय बेचने का काम करने वाले डी प्रकाश राव एक ऐसी ही शख्सियत है जो अपने काम की वजह से हम सबसे अलग है, समाज में उनकी भूमिका मात्र चाय बेचने वाले की नहीं है बल्कि समाज की संरचना करने वालों में शुमार है।

देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने प्रसिद्ध कार्यक्रम “मन की बात” में 30 मई 2018 को डी प्रकाश का ज़िक्र करते हुए कहा कि ‘मुझे आज ओडिशा स्थित कटक के एक चाय बेचने वाले डी प्रकाश राव से मुलाकात का मौका मिला। वह पिछले 5 दशक से चाय बेच रहे हैं, लेकिन वह जो काम कर रहे हैं उसके बारे में जानकर आप सभी हैरान रह जाएंगे। वह ऐसे 70 से भी अधिक बच्चों को पढ़ाने का काम कर रहे हैं, जो खराब आर्थिक स्थिति के चलते स्कूल नहीं जा पाते। यही नहीं, उन्होंने अपनी झुग्गी में ही आशा आश्वासन खोला है, जिसमें वह ऐसे लोगों को सहारा दे रहे हैं, जिनके पास अपना घर नहीं है।’  दरअसल प्रकाश राव चाय बेचने के साथ-साथ स्कूल भी चलाते हैं। उनके स्कूल में झोपड़ियों में रहने वाले बच्चों को पढ़ाते हैं। इस साल गणतंत्र दिवस के एक दिन पहले ही देश के महत्वपूर्ण सम्मान ‘पद्म पुरस्कारों’ की घोषणा की गई है, जिसमें पद्मश्री सम्मान पाने वाले डी प्रकाश राव का नाम भी अंकित है। पिता की मृत्यु की बाद घर की आर्थिक तंगहाली की वजह से ग्यारहवीं कक्षा में पढ़ाई छोड़ चुके डी प्रकाश राव को शिक्षा का महत्त्व पता है इसलिए वे सभी को इस अनमोल महत्त्व से वाकिफ करवाना चाहते है, इसलिए हम तो इन्हें रियल हीरो ही कहेगें।

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