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देश ही नहीं विदेशो में भी मनाया जाता है दशहरा का त्यौहार 

देश में इन दिनों त्योहारों का सुभारम्भ हो चूका है।  ऐसे में हिन्दुओं के सबसे लोकप्रिय त्यौहारों में से एक दशहरा का भी त्यौहार है। प्राचीन काल से मनाए जा रहे इस त्योहार को बुराई पर अच्छाई की जीत, अन्याय पर न्याय की जीत और असत्य पर सत्य की जीत के रूप में मनाया जाता रहा है। वही अश्विन मास की नवरात्रि के साथ ही दशहरा यानी विजयादश्मी का त्योहार मनाने का प्रचलन है। धार्मिक ग्रंथो के अनुसार दशहरा का महत्व कुछ इस प्रकार है

शास्त्रों और पौराणिक कथाओं के अनुसार दशहरा का महत्त्व 

महाकाव्य रामायण कथा के रचयिता महर्षि वाल्मीकि  के अनुसार  भगवान विष्णु के आठवें अवतार भगवान राम ने रावण के द्वारा माता सीता के हरण किये जाने के उपरांत  दुष्टो के विनाश का संकल्प लिया था । कहा जाता है कि तभी से हमारे देश में कुरीतियों को ख़त्म करने और बुराइ से अच्छाई पर जित का प्रतिक बन गया।

दशहरा को लेकर एक मान्यता यह भी है कि मां दुर्गा ने महिषासुर से युद्ध कर उसे पराजित  किया था । युद्ध में महिषासुर का अंत होने के बाद देवताओं ने इस खुशी के उपलक्ष्य में मां दुर्गा को वचन दिया इस दिन को आज से विजयादश्‍मी के रूप में मनाया जाएगा और लोग आपको हमेशा शक्ति के रूप में पूजते रहेंगे।

एक अन्य मान्यता के अनुसार जब पांडव वनवास के लिए गए, तब उन्होंने अपना हथियार किसी शमी नाम के वृक्ष के निचे रखा था तथा 12 साल यह हथियार उस वृक्ष में दबे सुरक्षित रहा था।  वनवास के बाद युद्ध हुआ युद्ध में कौरव पराजित हुए।  कहा जाता है कि यह घटना भी विजयादश्‍मी को हुई जिसे अधर्म पर धर्म की  जीत  जाती है।  तब से हर साल विजयादश्मी का त्योहार मन्ये जाने लगा।

देश के अलग अलग राज्यों में दशहरा मानाने की परम्परा अलग अलग तौर पर देखि जाती है 

 

1. हिमाचल प्रदेश में कुल्लू का दशहरा बहुत प्रसिद्ध है। पहाड़ी लोग अपने ग्रामीण देवता का धूम धाम से जुलूस निकाल कर पूजन करते हैं। इस प्रकार जुलूस बनाकर नगर के मुख्य भागों से होते हुए नगर परिक्रमा करते हैं और कुल्लू नगर में देवता रघुनाथजी की वंदना से दशहरे के उत्सव का आरंभ करते हैं। दशमी के दिन इस उत्सव की शोभा निराली होती है।

2.  बस्तर में दशहरे के मुख्य कारण को राम की रावण पर विजय ना मानकर, लोग इसे मां दंतेश्वरी की आराधना को समर्पित एक पर्व मानते हैं।

3. बंगाल, ओडिशा और असम में यह पर्व दुर्गा पूजा के रूप में ही मनाया जाता है।

4. तमिल नाडु, आंध्र प्रदेश एवं कर्नाटक में दशहरा नौ दिनों तक चलता है जिसमें तीन प्रमुख देवियो लक्ष्मी, सरस्वती और दुर्गा की पूजा करते हैं।

5.गुजरात में मिट्टी सुशोभित रंगीन घड़ा देवी का प्रतीक माना जाता है और इसको कुंवारी लड़कियां सिर पर रखकर एक लोकप्रिय नृत्य करती हैं जिसे गरबा कहा जाता है।

6. महाराष्ट्र में नवरात्रि के नौ दिन मां दुर्गा को समर्पित रहते हैं, जबकि दसवें दिन ज्ञान की देवी सरस्वती की वंदना की जाती है।

7. कश्मीर के अल्पसंख्यक हिन्दू नवरात्रि के पर्व को अत्यंत पुरानी परंपरा के अनुसार नौ दिनों तक लोग माता खीर भवानी के दर्शन करके यह त्यौहार मनाया  जाता है।

 

दशहरा में रामायण मंच का इतिहास 

पौराणिक कथाओ के अनुसार रामलीला मंचन महर्षि वाल्मीकि की महाकाव्य रामायण की पौराणिक कथाओ पर आधारित था।  परन्तु अब इसकी पटकथा गोस्वामी तुलसीदास जी द्वारा रचित महाकाव्य रामचरितमानस पर धारित है। पौराणिक कथाओ के अनुसार 16वी शताब्दी में तुलसीदास  के शिष्यों ने रामलीला मंचन की शुरुआत की थी।  कहा जाता है की उस समय गोस्वामी तुलसीदास ने रामचरितमानस पूरी की थी।  तब काशी के नरेश ने रामनगर में रमिला मंचन करने का संकलप लिया था।  जिसके बाद से पुरे देश में दशहरा के अवसर पर रामलीला मंचन का प्रारम्भ हुआ।  आज भारत में ही नहीं अपितु पुरे विश्वभर में रामलीला मंचन का आयोजन किया जा रहा है जैसे की नेपाल, थाईलैंड, लाओस, फिजी, दक्षिण अफ्रीका, कनाडा, सूरीनाम, मौरीसस।  वही थाईलैंड में इस पर्व को रामकियान के नाम से मनाया जाता है।

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