fbpx
Hindi News, हिंदी समाचार, Samachar, Breaking News, Latest Khabar
bill
Breaking News National

नागरिकता संशोधन बिल पर विदेश में उठे सवाल  

नेशनल थॉट्स डेस्क।  लोकसभा से सोमवार को पास हुए नागरिकता बिल का विपक्षी दल और पूर्वोत्तर के राज्य ही नहीं, विदेश से भी विरोध होने लगा है। केंद्र सरकार ने सभी की चिंताओं को सिरे से खारिज किया है। अमेरिका में अंतरराष्ट्रीय धार्मिक स्वतंत्रता आयोग (USCIRF) ने इस विधेयक को लोकतांत्रिक भावना के खिलाफ और पक्षपातपूर्ण बताया, तो अमेरिकी संसद की विदेश मामलों की कमिटी ने इसे उन लोकतांत्रिक मूल्यों के उलट बताया, जिनके आधार पर भारत और अमेरिका चलते हैं। पाकिस्तानी पीएम इमरान खान को इसमें पड़ोसी देशों के मामलों में दखल दिखा तो यूरोपीय संघ ने भी संविधान में समानता की मूल भावना का पाठ याद दिलाया।

इस पर विदेश मंत्रालय ने कहा कि अमेरिकी आयोग को हमारे मामलों में दखल देने की जरूरत नहीं है, न ही उन्हें यह अधिकार है। नागरिकता बिल (CAB) किसी भी व्यक्ति से धर्म के आधार पर न तो नागरिकता छीनता है, न ही किसी भी धर्म के लोगों को नागरिकता हासिल करने के दरवाजे बंद करता है। अमेरिकी आयोग को जमीनी हकीकत की जानकारी नहीं है। वह पूर्वाग्रहों पर बयानबाजी कर रहे हैं। सभी देशों को अधिकार है कि वह अपने नागरिकों की पहचान करे, इसके लिए कानून बनाए।

अमेरिकी संसद की विदेशी मामलों की समिति ने मामले पर बयान जारी करते हुए कहा, “धार्मिक बहुलवाद भारत और अमेरिका दोनों की नींव है और हमारे साझा मूल्यों में से एक है। धर्म के आधार पर नागरिकता इस बुनियादी लोकतांत्रिक सिद्धांत को कमजोर करती है।” बता दें कि ये समिति अमेरिकी संसद की एक शक्तिशाली समिति है और जैसा कि नाम से जाहिर है विदेशी मामलों पर अपनी राय रखती है।

Related posts