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71st Republic Day celebrated in the country, know the history of Republic Day
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देश में 71वें गणतंत्र दिवस की धूम, जानें गणतंत्र दिवस का इतिहास

26 जनवरी के दिन को भारतीय गणतंत्र दिवस के रूप में मनाते है। राजपथ पर सेना के शौर्य के साथ-साथ विभिन्न संस्कृति की मनमोहक झलकियां मनमोह लेती है। 26 जनवरी 1950 को देश में पहली बार गणतंत्र दिवस मनाया गया। मगर ये आश्चर्य जनक है कि गणतंत्र दिवस के लिए मशहूर राजपथ पर इसका आयोजन नहीं किया गया था। देश का पहला गणतंत्र दिवस इर्विन स्टेडियम में मनाया गया। ली। इसके बाद भी 1954 तक गणतंत्र दिवस कभी किंग्सवे कैंप, कभी रामलीला मैदान तो कभी लाल किले पर भारी हर्षोउल्लास के साथ मनाया जाता है। राजपथ पर सर्वप्रथम 1955 में गणतंत्र दिवस समारोह का आयोजन किया गया। 1955 से आजतक हर साल 26 जनवरी को गणतंत्र दिवस का समारोह यहाँ किया जाता है। जहाँ राष्ट्रपति तिरंगा फहराने के साथ-साथ शहीदों को श्रद्धांजिल देते है।

26 जनवरी का इतिहास और प्रथम गणतंत्र दिवस की विशेषता

26 जनवरी 1950 में इस दिन ही भारत सरकार अधिनियम (एक्ट) (1935) को हटाकर भारत का संविधान लागू किया गया था। 26 जनवरी 1950 को सुबह 10.18 बजे भारत एक गणतंत्र बना। इस के छह मिनट बाद 10.24 बजे राजेंद्र प्रसाद ने भारत के पहले राष्ट्रपति के रूप में शपथ ली थी। इस दिन पहली बार बतौर राष्ट्रपति डॉ राजेंद्र प्रसाद बग्गी पर बैठकर राष्ट्रपति भवन से निकले थे। इस दिन पहली बार उन्होंने भारतीय सैन्य बल की सलामी ली थी। पहली बार उन्हें गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया था।

भारतीय इतिहास के अनुसार भारत की संविधान सभा ने 26 नवंबर 1949 में भारत के संविधान को स्वीकार किया था,जबकि 26 जनवरी 1950 को भारत का संविधान पूरे देश में लागू हुआ था। इसी उपलक्ष्य में हर साल गणतंत्र दिवस मनाया जाता है। 26 जनवरी का दिन इसलिए चुना गया क्योंकि 26 जनवरी 1929 को अंग्रेजों की गुलामी के विरुद्ध कांग्रेस ने ‘पूर्ण स्वराज’ का नारा दिया था। इसके बाद से ही इस दिन को चुना गया था।

राजपथ पर होने वाले कार्यक्रम और विशेष बदलाव

राजपथ पहुंचने के बाद से ही परेड का रूट लगभग एक सा रहा है। 26 जनवरी की परेड की शुरुआत रायसीना हिल्स से होती है। इसके बाद राजपथ, इंडिया गेट से गुजरती हुई परेड लाल किले तक जाती है। यह सफर करीब 8 किलोमीटर तक का होता है। राष्ट्रपति को सलामी के साथ परेड की शुरुआत होती है। परेड शुरू होने से पहले राष्ट्रपति 14 घोड़ों की बग्घी में बैठकर इंडिया गेट पर आते हैं, जहां प्रधानमंत्री उनका स्वागत करते हैं।

1973 में तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने इंडिया गेट पर स्थित अमर जवान ज्योति पर सैनिकों को श्रद्धांजलि देने की परंपरा शुरू की थी। जो पिछले साल तक चली आ रही थी। अमर जवान ज्योति 1971 में पाकिस्तान से युद्ध में शहीद जवानों के लिए तैयार की गई थी। मगर इस बार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पिछले साल तैयार नेशनल वॉर मेमोरियल जाकर जवानों को श्रद्धांजलि देंगे। यहां अब तक हुए युद्ध में शहीद जवानों के नाम अंकित हैं।

 

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