धैर्य रखें परमात्मा ही भला करेगा

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धैर्य रखें परमात्मा ही भला करेगा

हम सभी परमात्मा की बंदगी करते है, कुछ अच्छा हो तो खुदा का शुक्र अदा करते है और बुरा हो तो किस्मत को कोसने के अलावा परमात्मा के विधान को ही कटघरे में खड़ा करते है। लेकिन जो परमात्मा की दिल से बंदगी करते है उसे कभी परमात्मा और उसके विधान पर शक नहीं होता और हर अच्छे और बुरे विधान को स्वीकारते है औरमालिक ही भला करेगाइस पर कायम रहते है। 

एक बार की बात है किसी गॉंव में एक बुजुर्ग ग्रामीण मालिक (परमात्मा) पर पूरा विश्वास के रखता और उसके हर विधान को मालिक ही भला करता है और वो ही करेगा मानता फिर चाहे परिस्थिति कैसी भी हो। उस बुजुर्ग के पास एक बहुत ही सुंदर और शक्तिशाली घोड़ा था। वह उससे बहुत प्यार करता था। उस घोड़े को खरीदने के कई आकर्षक प्रस्ताव उसके पास आए, मगर उसने उसे नहीं बेचा।एक रात उसका घोड़ा अस्तबल से गायब हो गया। गांव वालों में से किसी ने कहाअच्छा होता कि तुम इसे किसी को बेच देते। कई तो बड़ी कीमत दे रहे थे। बड़ा नुकसान हो गया।

परंतु उस बुजुर्ग के चेहरे पर घोड़े के चले जाने के दुःख की जरा सी शिकस्त नही थी , और बुजुर्ग ने बड़े प्यार से कहा मालिक ही भला करेगा। कुछ दिन बाद उसका घोड़ा अस्तबल में वापस गया और वो अपने साथ कई जंगली घोड़े घोड़ियाँ ले आया था। ग्रामीणों ने बुजुर्ग को बधाईयाँ दी और कहा कि उसका तो भाग्य चमक गया है परंतु उस बुजुर्ग ने इस बार भी यही दोहराते हुऐ कहामालिक ही भला करेगा। 

अगले दिन उस बुजुर्ग का बेटा एक जंगली घोड़े की सवारी करते गिर पड़ा और उसकी टाँग टूट गई। लोगों ने बुजुर्ग से सहानुभूति दर्शाई और कहा कि इससे तो बेहतर होता कि घोड़ा वापस ही नहीं आता। वो वापस आता और ही ये दुर्घटना घटती। बुजुर्ग ने कहा – “किसी को इसका निष्कर्ष निकालने की जरूरत नहीं है। क्योंकि कल तो तुम ही घोड़ों की वापसी आने की बधाइयाँ दे रहे थे, और आज जब मेरे बेटे को जंगली घोड़े ने गिरा दिया तो तुम ये सोच रहे हो की काश घोड़ा वापस ही ना आता

कुछ दिनों के बाद राजा के सिपाही गांव आए, और गांव के तमाम जवान आदमियों को अपने साथ लेकर जाने लगे। क्योंकि राजा को पड़ोसी देश में युद्ध करना था, और इसलिए नए सिपाहियों की भरती जरूरी थी। सबके घर जा कर उनके घर के नौजवान लड़कों को अपने साथ ले जाने लगे  और जब उस बुजुर्ग के घर गए, उस बुजुर्ग का बेटा चूंकि घायल था और सिपाहियो ने कहा इसकी तो टांग ही टूट गई है ये युद्ध में किसी काम का नहीं है, इसे ले जाने का कोई फायदा नही

इसलिए उस बुजुर्ग के बेटे को नहीं ले जाया गया। गांव के बचे बुजुर्गों ने उस बुजुर्ग से कहा – “हमने तो हमारे पुत्रों को खो दिया। दुश्मन तो ताकतवर है। युद्ध में हार निश्चित है। तुम भाग्यशाली हो, कम से कम तुम्हारा पुत्र तो है।उस बुजुर्ग ने कहाअभिशाप या आशीर्वाद के बीच बस निगाह का फर्क होता है। किसी भी घटित चीज को नकरात्मक ले कर ना सोचे बल्कि जो चीज हो रही है और होने ही वाली है और हो कर ही रहेगी तो क्यों ना उसे मालिक की मंजूरी समझकर ख़ुशीख़ुशी स्वीकार करें, वो क्या और क्यों करता है ये सोचना हमारा काम नही।

ये भी तो उसकी मौज हुई जो मेरा घोड़ा अस्तबल छोड़ के चला गया। ये उसकी मौज हुई जी घोड़ा कुछ दिन जंगल में रहकर वहाँ जंगली घोड़ों से दोस्ती करने के बाद वापस आकर अपने साथ कुछ जंगली घोडे भी ले कर आया। ये तो उसकी मौज थी मेरे बेटे को जंगली घोड़े पर सवारी करने का शौक हुआ। ये भी उसकी मौज थी कि जंगली घोड़े की सवारी करते मेरे बेटे की टांग टूट गयी और वो घायल हो गया। और ये उसकी मौज हुई कि राजा के सिपाही गांव के तमाम नौजवानों को लेकर गए लेकिन मेरे घायल बेटे को किसी काम का ना समझ कर वहीँ छोड़ कर चले गए और मेरा बेटा बच गया  

अर्थात–  परमात्मा ही भला करता है। फिर चाहे हमारी परिस्थिति कैसी भी हो, ये तो उसकी मौज है प्यारे कि कब किसको छोटा सा दर्द दे कर हमेशा के लिए बेदर्द कर दे। ज़रूरत है खुदा की बंदगी पर बिना संदेह किए यह विश्वास रखने की किपरमात्मा ही भला करता है

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