अमेरिका के खिलाफ भारत और चीन हुए एक

0
27
National Thoughts
National Thoughts

नई दिल्ली || व्यापारिक मुद्दे पर भारत और चीन का एकमत होना आश्चर्य की बात नहीं है। अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप की व्यापारिक मसलों में अमेरिका फर्स्ट की पॉलिसी से चीन के सामने बड़ी चुनौती खड़ी हो गई है और दोनों देशों के बीच जारी व्यापारिक बातचीत (ट्रेड टॉक्स) के सकारात्मक दिशा में जाने का कोई संकेत नहीं मिल रहा है। अमेरिका ने 5.6 अरब डॉलर (करीब 395 अरब रुपये) मूल्य की आयातित वस्तुओं पर ड्यूटी बेनिफिट्स हटाकर भारत को भी व्यापारिक झटका दिया है। यूएस ट्रेड सेक्रटरी विल्बर रॉस ने अपने हालिया दिल्ली दौरे में भारत पर आरोप लगाया कि वह अमेरिका से आयातित वस्तुओं पर अन्यायपूर्ण तरीके से आयात शुल्क लगाता है। बहरहाल, अमेरिका की एकपक्षीय कार्रवाई के खिलाफ बहुपक्षीय एकजुटता से भारत और चीन फायदे में रहेंगे।

इस बैठक में चर्चा का दूसरा विषय डब्ल्यूटीओ के विवाद निपटान तंत्र की अपीलीय संस्था का पतन होना है। विभिन्न देशों के बीच व्यापारिक विवादों के निपटारे के लिए सुनवाई करने वाली अपीलेट बॉडी इसलिए अप्रभावी हो गई है क्योंकि अमेरिका ने जजों की नियुक्ति पर रोक लगा दी। इस संस्था में आम तौर पर सात जज होते हैं, लेकिन फिलहाल इसमें तीन जज ही बचे हैं। दिसंबर में दो और जजों की सेवानिवृत्ति के बाद सिर्फ एक जज ही बच जाएंगे। उसके बाद किसी भी मसले पर सुनवाई की गुंजाइश खत्म हो जाएगी क्योंकि तीन जजों का जरूरी कोरम ही पूरा नहीं हो पाएगा।

वर्ल्ड ट्रेड ऑर्गनाइजेशन में जो मुद्दे फंसे हैं, उनमें भारत और चीन की दो-दो शिकायतें प्रमुख हैं। भारत ने लोहा और स्टील के आयात पर अमेरिका द्वारा सेफगार्ड ड्यूटीज लगाए जाने के आदेश को चुनौती है। एक अन्य मामले में भारत ने नवीकरणीय ऊर्जा (रीन्यूएबल एनर्जी) पर अमेरिकी कदमों को चुनौती दी है। वहीं, चीन ने अमेरिका द्वारा टैरिफ लगाए जाने के खिलाफ डब्ल्यूटीओ में शिकायत की है। साथ ही, चीन ने कुछ स्टील प्रॉडक्ट्स पर अमेरिका द्वारा ड्यूटी बढ़ाने के फैसले को चुनौती दी है। दरअसल, करीब 70 देशों ने अमेरिका से जजों की नियुक्ति पर रोक हटाने की बार-बार गुहार लगाई है। यह दुर्लभ मामलों में एक है जिसमें भारत, चीन और यूरोपियन यूनियन एक तरफ खड़ा है।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here