मेहनत की कमाई से बनाई सड़क

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सरकार की आलोचना कर विकास की मांग करने वालों के लिए  सूलत्रीम छोंजोर एक ऐसे  उदाहरण हैं जो अपनी मातृभूमि के विकास के लिए किसी पर आश्रित नहीं है।  आज रियल हीरो में हम आपके लिए सूलत्रीम छोंजोर के जीवन से जुड़ी उस कहानी से आपको रूबरू करवाएंगे जो हमें यह बताता है कि भारत में बड़े दिल वालों की कमी नहीं है। लद्दाख की जांस्कर घाटी के एक गांव में रहने वाले 75 साल के सूलत्रीम छोंजोर सन् 2000 में राज्य के हस्तकला विभाग से सेनानिवृत हुए। वे इस बात से काफी दुखी थे कि उनके गांव की पहुंच भारत के प्रमुख क्षेत्रों तक नहीं है। राज्य प्रशासन की ओर से भी कुछ खास काम नहीं हो पाया था।  इस काम के लिए उन्होेने अपनी पैतृक संपत्ति और जमापूंजी बेचकर तकरीबन 57 लाख रूपए जुटाए और उससे मशीन और पांच गधे खरीदे। उनकी मदद से सड़क निर्माण का काम शुरू हुआ। उन्होंने अकेले ही 38 किलोमीटर की सड़क बना डाली। बाद में बॉर्डर रोड ऑर्गनाइजेशन ने इसकी जिम्मेदीरी ले ली। उन्हें उनके इस लोक कल्याण के कार्य के लिए पुरस्कृत भी किया गया।  75 साल की उम्र में भी कुछ कर गुज़रने का जोश होना अपने आप मेंं बड़ी बात है। ऐसे में अपने दम पर सड़क का निर्माण करना काबिले तारीफ है। इसलिए हम तो इन्हें रियल हीरो ही कहेंगे।

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