भाजपा ने दिल्ली में सीलिंग रोकने की कतई कोशिश नहीं की -शीला दीक्षित

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ई दिल्ली || दिल्ली प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष एवं उत्तर पूर्वी दिल्ली से कांग्रेस प्रत्याशी शीला दीक्षित ने क्षेत्र के मतदाताओं को सम्बोधित करते हुए कहा कि मैं राजनीतिज्ञ होने से पहले एक मां भी हूं और एक ग्रहिणी भी। मां की हैसियत से मैं सीलिंग से प्रभावित अपने बच्चों की जद्दोजहद को भली-भांति पहचान सकती हूं। एक ग्रहिणी होने के नाते मैं उन कठिनाइयों और परेशानियों को समझती हूं जिनसे सीलिंग के कारण दिल्ली के लाखों परिवार रोजी-रोटी तक की समस्या से जूझने को मजबूर हो गये हैं। श्रीमती शीला दीक्षित ने शिव विहार तिराहा नजदीक डिस्पेंसरी मुस्तफाबाद और गली नः1 विकास समिति, दुर्गा पुरी में चुनाव प्रचार किया और जनसभाऐं की।शीला दीक्षित ने कहा कि ‘आप’ पार्टी और भाजपा की नौटंकियों और नूरा कुश्ती ने हंसती-खेलती दिल्ली को बदहाल हालत में पहुंचा दिया। न्यायालय के आदेश के नाम पर दिल्ली में, खासतौर से हमारे उत्तर पूर्वी क्षेत्र में, सीलिंग अभियान को रुकवाने के प्रयास करने की बजाय भाजपा के सांसद आंख मूंद कर बैठ गये। भाजपा की केन्द्र सरकार ने सीलिंग रुकवाने और लाखों कर्मचारियों को बेरोजगार होने से बचाने के लिए कुछ नहीं किया। भाजपा के एक अभिनेता से नेता बने सांसद ने सीलिंग के विरुद्ध केवल अभिनय किया मगर ठोस कार्य कुछ भी नहीं किया।

दीक्षित ने याद दिलाते हुए कहा कि सन् 2006 में कांग्रेस शासन काल में भी इसी प्रकार की स्थिति पैदा होने पर कांग्रेस ने त्वरित कार्यवाही करते हुए अध्यादेश जारी कर दिल्ली के उद्योगों को बर्बाद होने से बचा लिया था और किसी को भी रोजी-रोटी कमाने से वंचित नहीं होने दिया था। मगर आज तो यकीनन किसी साजिश के तहत भाजपा ने दिल्ली में सीलिंग रोकने की कतई कोशिश नहीं करी। दिल्ली के सांसद नाचते, गाते, बजाते केवल अपने शीर्ष नेतृत्व की चमचागिरि और चापलूसी में लगे रहे और दिल्लीवासी बर्बाद होते रहे। भाजपा का केन्द्रीय नेतृत्व अपने चुनिंदा मित्र उद्योगपतियों के फायदे और विदेशी निवेश के लालच में दिल्ली के छोटे-छोटे व्यापारियों एवं उद्योगों की बर्बादी की ओर से आखें मूंद बैठा रहा। शीला दीक्षित ने क्षेत्रवासियों को विश्वास दिलाते हुए वायदा किया और कहा कि आप सबके समर्थन और सहयोग से सत्ता अधिकार प्राप्त होते ही सर्वप्रथम इस सीलिंग के जिन्न से निजात दिलवाकर रिहायशी मकानों, छोटे उद्योगों और व्यापारियों को इज्ज़त के साथ कारोबार जारी रखने के प्रावधान किये जायेंगे और इसके लिए अध्यादेश लगाकर स्थायी समाधान किया जायेगा।

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