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After all, why the Indian market is completely dependent on China
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आख़िर क्यों भारतीय बाजार पूरी तरह से चीन पर निर्भर है #hindichinibayebaye

नैशनल थॉट्स/आलोक गौड़:- लद्दाख में गलवान घाटी में चीन की सेना के साथ भारतीय सैनिकों की हिंसक झड़पें होने के बाद से देश में सोशल मीडिया से लेकर सरकार समर्थक व्यापारिक संगठनों की ओर से चीन में बनी वस्तुओं का बहिष्कार करने की मुहिम शुरू कर दी गई है। इस मुहिम को लेकर न केवल देश के व्यापारी दो गुटों में बंट गए हैं बल्कि कोरोना से निपटने के लिए लागू किए गए लाक डाउन की मार झेलने वाले दुकानदारों के सामने एक नया संकट भी पैदा हो गया है।
दिलचस्प बात तो यह है कि देश प्रेम के जज्बे की वजह से जनता तो चीन में बनी वस्तुओं का बहिष्कार करने की अपील कर रही है। दूसरी ओर मोदी सरकार चीन की कंपनी को करोड़ों रुपए के ठेके आवंटित कर रही है।
चीन से क्या आयात बंद किया जा सकता है और अगर ऐसा हो गया तो उसका भारतीय बाजार पर क्या असर पड़ेगा। नेशनल थाट्स ने व्यापारिक संगठनों के साथ बातचीत कर इसे जानने व समझने का प्रयास किया है।
इस संबंध में कंफेडरेशन ऑफ आल इंडिया ट्रेडर्स ( कैट) के महासचिव प्रवीण खंडेलवाल का कहना है कि लद्दाख की गलवान घाटी में चीन और भारत की सेना के बीच हुई खूनी झड़प के बाद से ही भारत के व्यापारी और ग्राहक दोनों ने ही चीन में बनी वस्तुओं का बहिष्कार शुरू कर दिया है। उनके मुताबिक व्यापारियों ने गत 10 जून से ही चीन से सामान आयात करना बंद कर दिया है।

उनके मुताबिक भारत हर साल चीन से साढ़े पांच लाख करोड़ रुपए का सामान आयात करता है। उन्होंने कहा कि देशभक्ति के जज्बे की वजह से दुकानदार और ग्राहक दोनों ने ही यह फैसला अपने स्तर पर लिया है। उनका यह भी कहना है कि जब बाजार में चीनी माल की मांग होगी ही नहीं तो दुकानदार बेचेंगे कैसे।
दूसरी तरफ फेडरेशन ऑफ सदर बाजार ट्रेडर्स एसोसिएशन के उपाध्यक्ष परमजीत सिंह पम्मा का कहना है कि चीन के साथ सीमा पर तनाव की इस घड़ी में व्यापारी पूरी तरह से सरकार और देश के साथ खड़े हैं। मगर जहां तक चीन से वस्तुएं आयात करने का मामला है तो इस बारे में सरकार को ही कोई नीति बना कर उस पर अमल करना होगा।

उनके मुताबिक अभी तक देश में चीन से आयात की जाने वाली वस्तुओं का कोई विकल्प नहीं है। इसके अलावा चीन से आयात पर प्रतिबंध लगाने का फैसला भी सरकार को ही लेना होगा। क्योंकि अगर एक व्यापारी चीन से माल मंगवाना बंद भी कर देगा तो उसका पड़ोसी मंगवा कर बेचने लगेगा।
उन्होंने बताया कि देश के खुदरा और थोक व्यापार पर 60 से 80 फीसदी तक पर चीन के सामान का कब्जा है। अगर बाजार में कोई स्थानीय वस्तू बिक भी रही है तो उसमें कच्चे माल या पुर्जे के रूप में चीन में बनी वस्तुओं का उपयोग जरूर होता है।
परमजीत सिंह पम्मा ने बताया कि बच्चों के खेलने वाले खिलौने बाजार में 10 रूपए से लेकर 150 रूपए तक आसानी से मिल जाते हैं। जबकि भारत में बने खिलौने की कीमत शुरू ही पांच सौ रुपए से होती है।

उन्होंने कहा कि यदि किसी कारणवश चीन से आयातित सामान आने में चार दिन की देरी हो जाती है तो स्थानीय निर्माता अपने माल की कीमत दुगनी कर देते हैं। उन्होंने कहा कि आज देश की इंडस्ट्रीज बंद हो गई है। उद्यमी बैंकों के और दूसरे कर्ज के जाल में फंसे हुए हैं। सरकार को इंडस्ट्रीज को दुबारा से उसके पैरों पर खड़ा करने की व्यवस्था करनी चाहिए।

उन्होंने कहा कि सरकार अगर दुकानदारों को चीनी सामान के विकल्प के रूप में कम दाम पर बेहतर क्वालिटी की वस्तुएं मुहैया कराने की व्यवस्था करेगी। तब ही चीन से आयात पर प्रतिबंध लगाया जा सकेगा। उन्होंने कहा कि सबको रोजी-रोटी कमानी है। इसीलिए दुकानदार चीन से माल मंगवाते हैं।

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