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Anant Chaturdashi Fasting and Story 12 September 2019
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अनन्त चतुर्दशी (व्रत एवं कथा विधान ) 12 सितंबर 2019

भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी को यह शुभ योग उपस्थित होता है । इसमें उदय व्यापिनी तिथि अर्थात सूर्योदय समय की तिथि ली जाती है और यदि इसमें पूर्णिमा का संयोग भी हो जाये तो अति उत्तम ।

व्रत विधि :–

इस दिन अलोना ( नमक रहित ) व्रत किया जाता है । व्रती पके हुए अन्न का नैवेद्य लेकर किसी पवित्र सरोवर या नदी तट पर जाए भूमि को गोबर से लीप कर ,उस पर कलश स्थापित करे ( अथवा जैसे सम्भव हो घर मे ही कलश स्थापित करे) तदन्तर उसकी पूजा करे । फिर कलश पर शेषशायी भगवान विष्णु की मूर्ति स्थापित करे और मूर्ति के पास चौदह ग्रन्थि युक्त ( चौदह गाँठों वाला) पीला डोरा रक्खे । इसके बाद ” ॐ अनन्ताय नमः” इस नाम मंत्र से उस सूत्र या डोरे का षोडशोपचार या यथासंभव पूजन करे , उसके बाद उस अनन्त को पुरुष अपनी दाहिनी भुजा और स्त्री अपनी बाहिनी भुजा में धारण करे।

इसके बाद ब्राह्मण को नैवेद्य और दक्षिणा दे विदा करें ।

पूजा के बाद इसका कथा श्रवण करें , जो इस प्रकार है ।

  • प्राचीन समय मे सुमन्तु नाम के वशिष्ठ गोत्र के ऋषि थे । उनकी बेटी का नाम शीला था , पुत्री नाम अनुसार ही सुंदर और सुशील थी। सुमन्तु जी ने उसका विवाह कौण्डिन्य मुनि से कर दिया ।
  • शीला ने भाद्रपद मास की इसी तिथि को भगवान विष्णु का व्रत किया और अनन्त को अपनी भुजा पर धारण कर लिया । भगवान की कृपा से उसका जीवन सुख-समृद्धि से भर उठा ।
  • दुर्भाग्य से एक दिन कौण्डिन्य मुनि ने क्रोध में उनके हाथ का वह अनन्त सूत्र तोड़ डाला और आग में फेंक दिया । इसके बाद उनकी सब सुख-समृद्धि नष्ट हो गयी । और वह गरीबी का जीवन जीने लगे । इस सबसे दुःखित हो कौण्डिन्य मुनि वन में चले गए और सिद्ध -,संतों से अनन्त भगवान के विषय में पूछने लगे , तब भगवान विष्णु के करुणा कर वृद्ध ब्राह्मण के रूप में प्रकट हो अनन्त व्रत करने को कहा । और उस व्रत के करने के पश्चात पुनः उनके किवन में सुख-सामर्थ्य लौट आया ।

भगवान विष्णु के इस अनन्त व्रत और अनन्त सूत्र को धारण करने वाले के सभी दारिद्र्य नष्ट हो सुख की प्राप्ति होती है ।

आचार्य भारत भूषण गौड़

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