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Another major negligence of the well-known Delhi Municipal Corporation for exploits
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कारनामों के लिए कुविख्यात दिल्ली नगर निगम की एक और बड़ी लापरवाही

सोशल मीडिया में प्रशासन से संबंधित कई सारे पोस्ट आए दिन वायरल होते रहते है। जिसमें कहीं सुनवाई न होने के बाद जनता जनार्दन को इस बारे में अवगत कराया जाता है। मामलों को अटकाने, भटकाने व लटकाने के लिए कुविख्यात दिल्ली नगर निगम  के वैसे तो कई ऐसे कारनामे है जो प्रशासन की कार्यशैली पर प्रश्न चिन्ह खड़े करती है। दिल्ली नगर निगम के कर्मचारी से लेकर अधिकारियों की महिमा अपरंपार है। ताजा मामला उत्तरी दिल्ली नगर निगम के सिविल लाईन जोन का है। यह मामला हॉस्पिटल में जन्मे अलग-अलग दो बच्चों का निगम के सिविल लाइन जोन में “जन्म पंजीकरण में एक ही पंजीकरण सँख्या ” देने का है।

18 अगस्त 2006 को चित्रा शर्मा पत्नी शैलेन्द्र कुमार ने सन्त परमानंद हॉस्पिटल में वेदांत कौडिल्य को जन्म दिया था। जिसका जन्म पंजीकरण हॉस्पिटल द्वारा ही करवाया गया था। एक महीने बाद बिना नाम लिखा जन्म प्रमाणपत्र परिजन ने हॉस्पिटल से ही ले लिया था जिस पर जन्म पंजीकरण सँख्या 06203965 व पंजीकरण दिनाँक 19/9/06 दर्ज थी और इस प्रमाण पत्र की संख्या 108639/2003 अंकित थी । जिसकी पूरी डिटेल हॉस्पिटल के रिकार्ड में भी दर्ज है। 

सन्त परमानंद हॉस्पिटल गए व प्रशासनिक विभाग में जाकर परिजनों ने सारी बात बताई। हॉस्पीटल प्रशासन ने  2006 का रजिस्टर निकालकर रिकार्ड समेत पूरे पेज की फोटो कॉपी दे दी जिस पर हस्पताल की मोहर व अधिकृत अधिकारी के मोहर समेत हस्ताक्षर दर्ज हैं। मामले का खुलासा तब हुआ जब परिजन को वेदांत कोडिल्य का आधार कार्ड बनवाने के लिए नाम लिखें जन्मपत्र की आवश्यकता हुई। कोडिल्य की माँ ने निगम के सिविल लाइन जोन में आवेदन किया जिसका कम्प्यूटराइज आई डी नम्बर 8702097 दिनाँक 14/6/19 मिला। नियमतः 21 दिन बाद यह प्रमाण पत्र मिलता है , लेकिन जब प्रमाण पत्र नहीं मिला तो सम्पर्क करने पर पता चला कि बच्चे का रिकार्ड नही मिल रहा।

कोटिल्य के नाना विनोद कुमार शर्मा ने प्रशालन की लापरवाही को सोशल मीडिया के माध्यम से उजागर करते हुए बताया कि दिल्ली नगर निगम की एक गलती की वजह से कोटिल्य के अस्तित्व पर बात आन पड़ी है। प्रशासन ने पहली गलती अस्पताल में जन्में दो बच्चों को एक ही  पंजीकरण संख्या देकर करी तो सालों बाद वहीं गलती सुधारते वक्त कर रही है। प्रशासन को चाहिए की दोनों बच्चों की समस्या को एक साथ सुलझाए ताकि भविष्य में बच्चों की पढ़ाई से लेकर सीविल सर्विस में कोई बाधा न आए।

कम्प्यूटराइज रिकार्ड चेक करने पर पता चला कि इस जन्म पंजीकरण में किसी बालिका (Female Child) का नाम दर्ज है। अत: एक ही पंजीकरण संख्या पर दो बच्चों को एक संख्या ही संख्या दे दी गई थी। जिसकी वजह से  वेदांत कौडिल्य को अपना नाम लिखा कम्प्यूटराइज जन्म प्रमाण पत्र नही मिल रहा क्योंकि रिकार्ड में निगम ने इनका नाम चढ़ाया ही नही। प्रशासन की लापरवाही की वजह से आज परिजन हर संभव जगह जाकर अपनी अर्जी लगा रहे है।  पंजीकरण सब रजिस्ट्रार  ने विभाग की गलती मानी लेकिन उन्होंने इस मामले में स्वतः कार्यवाही करने में असमर्थ बताया। वहीं DHO साहब सुनने व कुछ करने को तैयार नही हुए साथ ही उनपर नकली सर्टिफिकेट के नाम पर कार्यवाही करने तक की बात कहीं। निगम आयुक्त, मेयर साहब व DC सिविल लाइन जोन को ट्वीट कर अवगत कराया है। आगे की कार्यवाही के लिए परिवार प्रशासन और मीडिया का सहयोग चाहता है।

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