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Ayodhya dispute hearing to be final, Gogoi will give historic verdict
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आयोध्या विवाद की सुनवाई आखिरी चरम पर, गोगोई सुनाएंगें ऐतिहासिक फैसला

नई दिल्ली || सदियों से चली आ रही आयोध्या भूमि विवाद के लिए सुप्रीम कोर्ट में जारी प्रतिदिन सुनवाई का आज आखिरी दिन है। दो पक्षों के बीच भूमि के स्वामित्व को लेकर चला आ रहा है ये विवाद मूल रूप से रामजन्म भूमि और आयोध्या मस्जिद के अस्तित्व को लेकर है। सर्वोच्च न्यायलय ने पहले  17 अक्टूबर तक केस की सुनवाई पूरी करने की समय सीमा निर्धारित की थी जिसे बाद में 16 अक्टूबर कर दिया गया। जानकारी के मुताबिक अगले माह के शुरूआती हफ्ते तक सदियों से लटके इस विवाद में सुप्रीम कोर्ट अपना एतिहासिक फैसला सुना सकता है।

मुस्लिम कहीं और जाकर भी नमाज़ पढ़ सकते है-परासरण

अयोध्या विवाद में सभी मुख्य पक्षों को जिरह पूरी करने के लिए जो समय दिया गया था उसमें दोनों पक्षों को आरोप-प्रत्यारोप और तर्क-वितर्क करने का पूरा समय दिया गया। इसके साथ ही सुनवाई के बीच सुलह के विकल्प को भी जारी रखने की बात को सुप्रीम कोर्ट ने हरी झंडी दे दी थी। आज 39वें दिन की सुनवाई के दौरान हिंदू पक्षकार के वकील के परासरण ने कहा कि मुस्लिम कहीं और भी जाकर नमाज पढ़ सकते हैं। अयोध्या में 56-60 मस्जिद हैं। अपने इस दलील के माध्यम से हिन्दू पक्षकार ने मुस्लिमों के लिए बाबरी मस्जिद में नमाज की अनिवार्यता को नकारते हुए राम मंदिर बनाए जाने की बात कहीं।

रंजन गोगोई बनाएंगे इतिहास, सुनाएंगे ऐतिहासिक फैसला

उत्तर प्रदेश के अयोध्या में राम मंदिर और बाबरी मस्जिद के स्वामित्व को चल रहा है ये विवाद लगभग 500 साल पुराना है। इतिहास के जानकारों के अनुसार इस विवाद की शुरूआत 1528 में तब हुई थी जब मुगल शासक बाबर ने राम मंदिर को गिराकर वहां मस्जिद का निर्माण कराया था। इसी वजह से इसे बाबरी मस्जिद कहा जाने लगा था। विवादित स्थल पर हिंदू और मुस्लिम पक्षकारों में मालिकाना हक का विवाद सबसे पहले 1813 में शुरू हुआ। तब से लेकर आज तक इस स्थल पर दोनों पक्ष अपने-अपने मालिकाना हक़ को लेकर जिरह करते आ रहे है। चीफ जस्टिस रंजन गोगोई अपने रिटायरमेंट के साथ ही अबतक के सबसे संवेदनशील और चर्चित मामलें पर अपना ऐतिहासिक फैसला सुना सकते है।

 

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