भारत में कोरोना वायरस की दूसरी लह" />
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1.73 lakh new patients were found in 24 hours, 2.84 lakh were cured and 3,617 died
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कोरोना के नए वैरिएंट्स पर नजर रखने में पिछड़ा भारत

भारत में कोरोना वायरस की दूसरी लहर पहली के मुकाबले ज्यादा घातक साबित हुई है। ज्यादा लोग इन्फेक्ट हुए। मौतें भी ज्यादा हुईं। दूसरी लहर अभी थमी भी नहीं कि तीसरी लहर का डर सामने है। विशेषज्ञों की मानें तो दूसरी लहर के घातक रहने की वजह वायरस में हुए बदलाव (म्यूटेशंस) हैं। चीन से जो वायरस यहां पहुंचा था, उसकी संरचना यानी जीनोम सिक्वेंस में जमीन-आसमान का अंतर आ चुका है।

महामारी विशेषज्ञों की चिंता यह है कि ओरिजिनल वायरस पर सफल रही वैक्सीन क्या उसके म्यूटेंट्स पर भी उतनी ही प्रभावी होगी? इसके लिए कोरोना वायरस के वैरिएंट्स की पहचान, उनकी स्टडी और उन पर दवाओं व वैक्सीन के असर की जांच जरूरी है। अमेरिका, ब्रिटेन समेत तमाम देशों का पूरा फोकस इस समय जीनोम सिक्वेंसिंग (वायरस की संरचना की स्टडी) पर है ताकि वैरिएंट्स का जल्द से जल्द पता लगाया जाए और उन्हें फैलने से रोका जाए। पर भारत में भयानक हुई दूसरी लहर इस बात का संकेत है कि वायरस में हो रहे बदलावों की स्टडी में यहां न सिर्फ देरी हुई बल्कि कमी भी रह गई है।

दूसरी लहर से पहले सरकार वायरस में हो रहे बदलावों के बारे में जागरूकता बढ़ाने में भी नाकाम रही। हमारे यहां जिन डॉक्टरों को वैक्सीन के दोनों डोज लग चुके हैं, वे भी इन्फेक्ट हो रहे हैं। दिल्ली के दो अस्पतालों सर गंगाराम और इंद्रप्रस्थ अपोलो हॉस्पिटल के वैक्सीनेट हो चुके डॉक्टरों में इन्फेक्शन के कारणों पर रिपोर्ट अगले हफ्ते आने की संभावना है। इसमें यह पता चलेगा कि इन डॉक्टरों को इन्फेक्शन वैरिएंट्स की वजह से हुआ या कोई और ही कारण था। कुछ ही दिन पहले पद्मश्री से सम्मानित डॉ. केके अग्रवाल को वैक्सीन के दोनों डोज लगने के बाद भी कोरोना इन्फेक्शन हुआ और उनकी मौत हो गई। इस तरह के कई रहस्यों पर से पर्दा वैरिएंट्स की स्टडी ही उठा सकेगी।

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