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कोरोना वायरस : ब्रिटेन में आज , Covid-19 वैक्सीन का इंसानो पर ट्रायल
कोरोना वायरस : ब्रिटेन में आज , Covid-19 वैक्सीन का इंसानो पर ट्रायल
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कोरोना वायरस : ब्रिटेन में आज , Covid-19 वैक्सीन का इंसानो पर ट्रायल

कोरोना वायरस के कहर से जूझ रही दुनिया को इस महामारी से निजात दिलाने के लिए आज से ब्रिटेन में दुनिया का सबसे बड़ा ड्रग ट्रायल शुरू हो गया है। ब्रिटेन में बेहद अप्रत्‍याशित तेजी के साथ शुरू होने जा रहे इस परीक्षण पर पूरे विश्‍व की नजरें टिकी हुई हैं। वैज्ञानिकों को उम्‍मीद है कि ऑक्‍सफर्ड यूनिवर्सिटी की वैक्‍सीन ‘ChAdOx1 nCoV-19’ से आने वाले कुछ सप्‍ताह में चमत्‍कार हो सकता है।

ब्रिटेन में 165 अस्‍पतालों में करीब 5 हजार मरीजों का एक महीने तक और इसी तरह से यूरोप और अमेरिका में सैकड़ों लोगों पर इस वैक्‍सीन का परीक्षण होगा। ऑक्‍सफर्ड यूनिवर्सिटी के संक्रामक रोग विभाग के प्रफेसर पीटर हॉर्बी कहते हैं, ‘यह दुनिया का सबसे बड़ा ट्रायल है।’ प्रफेसर हॉर्बी पहले इबोला की दवा के ट्रायल का नेतृत्‍व कर चुके हैं। उधर, ब्रिटेन के हेल्थ मिनिस्टर मैट हैनकॉक ने कहा है कि दो वैक्सीन इस वक्त सबसे आगे हैं। उन्‍होंने कहा कि एक ऑक्सफर्ड और दूसरी इंपीरियल कॉलेज में तैयार की जा रही हैं। हैनकॉक ने बताया, ‘मैं कह सकता हूं कि गुरुवार को ऑक्सफर्ड प्रॉजेक्ट की वैक्सीन का लोगों पर ट्रायल किया जाएगा। आमतौर पर यहां तक पहुंचने में सालों लग जाते हैं और अब तक जो काम किया गया है उस पर मुझे गर्व है।”जून में आएगा वैक्सीन का परिणाम” ।

ब्रिटेन के आक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी में चल रहा है ट्रायल। दवा बनाने में लगे लोगों में भारत के विशेषज्ञ भी शामिल।
दुनिया भर के देशों के साथ ही भारत में भी कोरोना वायरस से संक्रमित मरीजों की संख्या में इजाफा हो रहा है। जिससे सरकार के साथ ही लोगों की चिंता भी बढ़ती जा रही है। इस बीच एक ऐसी खबर आई है जो सरकार और भारतवासी दोनों के लिए ही राहत व संतोष का सबब बन सकती है। वह खबर है कि भारत को इस साल के अंत तक कोरोना की दवा मिल सकती है। फिलहाल ब्रिटेन की ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी में इसका ट्रायल चल रहा है।
यह ट्रायल विश्व प्रसिद्ध वैक्सीनोलजिस्ट प्रोफेसर एड्रियन हिल की देखरेख में चल रहा है। उनके मुताबिक यदि ट्रायल के बाद दवा के परिणाम सही पाए जाते हैं तो इसी साल सितंबर से इसकी सप्लाई शुरू हो सकती है। उनके मुताबिक साल के अंत तक यह दवा भारत में भी उपलब्ध हो जाएगी।
इस दवा की केवल एक डोज से ही कोरोना से पीड़ित रोगी ठीक हो जाएगा। मगर इससे लिए उसके शरीर में रोगों से लड़ने की क्षमता होनी चाहिए। वरना यह दवा ज्यादा कारगर साबित नहीं होगी।
कोरोना की दवा बनाने वाली टीम के अहम सदस्य भारत के आदर पूनावाला के मुताबिक दवा के क्लीनिकल और अन्य ट्रायल सफलता से पूरे हो जाने पर दो हफ्ते के बाद हम दवा की एक महीने में पचास लाख डोज बनाने में सफल हो जाएंगे। बाद में यह क्षमता बढ़ा कर एक करोड़ डोज तक भी की जा सकती है।

 

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