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Delhi government wants to privatize Delhi Jal Board under One Zone One Operator Scheme - Adesh Gupta
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वन जोन वन ऑपरेटर योजना के तहत दिल्ली सरकार दिल्ली जल बोर्ड का निजीकरण करना चाहती है-आदेश गुप्ता

नई दिल्ली, । यमुना में अमोनिया का स्तर बढ़ने के कारण दिल्ली के विभिन्न क्षेत्रों में जलापूर्ति प्रभावित हुई और दिल्ली के लोग गंदे और प्रदूषित पानी पीने को मजबूर हो गए हैं। इस पर कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए दिल्ली भाजपा अध्यक्ष आदेश गुप्ता एवं दिल्ली विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष रामवीर सिंह बिधूड़ी ने प्रदेश कार्यालय में आयोजित प्रेसवार्ता को संबोधित किया। इस अवसर पर प्रदेश मीडिया प्रमुख नवीन कुमार, दिल्ली जल बोर्ड के सदस्य सतपाल मलिक एवं प्रियंका चैधरी उपस्थित रहे।
दिल्ली भाजपा अध्यक्ष आदेश गुप्ता ने कहा कि दिल्ली के लोगों को भी यह सच्चाई पता चलनी चाहिए कि उनकी सुरक्षा करने के बजाए केजरीवाल सरकार इस कोरोना संकट में और भी लापरवाह हो गई है। जिसका परिणाम है कि दिल्ली के लोग प्रदूषित हवा में सांस लेने के साथ ही जहरीले पानी पीने को मजबूर हैं।
उन्होंने बताया कि पिछले साल जब यमुना नदी में अमोनिया का स्तर बढ़ा था तब मुख्यमंत्री केजरीवाल ने घोषणा की थी 14 नए सिवेज ट्रीटमेंट प्लांट लगाए जाएंगे जिसके लिए 4206 करोड़ रुपए आवंटित किए गए थे लेकिन एक भी सेट नहीं लगा। डॉक्टर और विशेषज्ञों की राय है कि अगर अगले 10 साल लगातार यमुना में अमोनिया का स्तर बढ़ने से अमोनिया युक्त पानी अगर दिल्ली के लोग पीते रहे हैं तो कैंसर जैसी जानलेवा बीमारी हो सकती है।
आदेश गुप्ता ने कहा कि दिल्ली में 597 एमजीडी क्षमता के 20 सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट हैं और केवल 520 एमजीडी का उपयोग किया जा रहा है। 750 एमजीडी कचरा दिल्ली में उत्पादित किया जाता है जिसमें लगभग 230 एमजीडी को यमुना नदी में डाला जा रहा है जो जल प्रदूषण पैदा कर रही है। दिल्ली सरकार के पास घोषणाओं के लिए पैसे हैं, योजनाओं के लिए बजट है लेकिन उन घोषणाओं और योजनाओं को दिल्ली के लोगों के हितों में लागू करने की मंशा नहीं है। दिल्ली सरकार का बजट 65 हजार करोड़ रुपए का है लेकिन बजट के पैसे कहां खर्च हो रहे हैं इसका कोई हिसाब नहीं है, वहीं अपनी जिम्मेदारियों से बचने के लिए मुख्यमंत्री केजरीवाल दिल्ली जल बोर्ड की जिम्मेदारी भी छोड़ दी है।
उन्होंने बताया कि दिल्ली जल बोर्ड का बजट 7268.71 करोड़ रुपए है, उसपर से दिल्ली सरकार ने भी दिल्ली जल बोर्ड को 28000 करोड़ रुपए का ऋण दिया, ब्याज सहित यह ऋण 57 हजार करोड़ का है लेकिन नगर निगम का 13000 हजार करोड़ रुपए का बकाया फंड नहीं दे रहे हैं। केजरीवाल सरकार द्वारा ऐसी योजनाओं की लंबी लिस्ट है जो सिर्फ होर्डिंग्स पर दिखे जमीन पर नहीं। उनमें से एक योजना है मुख्यमंत्री सेप्टिक टैंक सफाई योजना, जो सिर्फ चुनावों के लिए किया गया था जिसके लागू न होने के कारण पिछले 1
महीने में चार मजदूरों की सेप्टिक टैंक सफाई के दौरान मृत्यु हो गयी। इस योजना के तहत 149.7 करोड़ की लागत से 80 टैंक लाने और सेप्टिक टैंक की सफाई मुफ्त में करवाने का वादा मुख्यमंत्री केजरीवाल ने किया था, लेकिन एक भी टैंक नहीं लाया गया और न ही सफाई करवाई गई। चैक-चैराहों पर मुख्यमंत्री केजरीवाल के चमकते हुए चेहरे लगे होर्डिंग पर बड़े-बड़े अक्षरों में लिखा होता है युद्ध प्रदूषण के विरुद्ध, यह युद्ध प्रदूषण के विरुद्ध कम और दिल्ली के लोगों के विरुद्ध ज्यादा लग रहा है।
दिल्ली सरकार और दिल्ली जल बोर्ड की लापरवाही का ही दुखद परिणाम है कि दिल्ली जल बोर्ड को प्रतिमाह 100 करोड़ रुपए का घाटा हो रहा है। जो दिल्ली जल बोर्ड केजरीवाल सरकार के आने से पहले 350 करोड़ रुपए की फिक्स डिपाजिट और 64 करोड़ रुपए प्रति माह के फायदे में था वह अब नुकसान में है। प्रोविडेंट फंड (पीएफ) को भी दिल्ली जल बोर्ड कर्मचारियों के वेतन से काट रही है, लेकिन ब्याज को अप्रैल 2016 से एक भी दिल्ली जल बोर्ड कर्मचारी के खातों में जमा नहीं किया जा रहा है।
दिल्ली सरकार को घेरते हुए आदेश गुप्ता ने पूछा कि मुख्यमंत्री केजरीवाल के पास बजट भी है, पैसा भी और योजना भी लेकिन फिर भी आज तक एक भी सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट क्यों नहीं लगाए गए? यमुना कार्य योजना के अनुसार 14 नए सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट स्थापित किए जाने थे, लेकिन नहीं लगाए और दिल्ली जल बोर्ड में व्याप्त भ्रष्टाचार के कारण दिल्ली के लोगों पर कोरोना संकट के समय में भी गंदा पानी पीने को मजबूर हैं।
भारी भरकम बिजली बिल तो दिल्ली सरकार भिजवा ही रही थी अब पानी के लिए भी लाखों का बिल भिजवा कर दिल्ली जल बोर्ड का घाटा जनता से वसूलने की तैयारी कर रही है। इतना ही नहीं, दिल्ली जल बोर्ड वन जोन वन ऑपरेटर योजना, जो हैदराबाद से आई हैं, उसे दिल्ली में लागू करना चाहती है जो निजीकरण का दूसरा रूप है। साफ और स्वच्छ पानी दिल्लीवासियों को मिले यह दिल्ली सरकार की नैतिक जिम्मेदारी है और कर्तव्य भी लेकिन दिल्ली सरकार जल बोर्ड का निजीकरण करने पर तुली है।
पिछले 6 वर्षों से जानबूझकर दिल्ली जल बोर्ड सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट और वाटर ट्रीटमेंट प्लांट की साफ सफाई नहीं की जा रही ताकि दिल्ली जल बोर्ड के निजीकरण को सही ठहरा सकें, लेकिन दिल्लीवासियों के हित में दिल्ली भाजपा केजरीवाल सरकार की इस योजना को सफल नहीं होने देगी।
उन्होंने कहा कि आम आदमी पार्टी विधायक टैंकर घोटाले में लिप्त हैं जिसके कारण लोगों को साफ स्वच्छ पानी नहीं मिल रहा है उनके अधिकारों का हनन किया जा रहा है। 24 घंटे जलापूर्ति का वादा करने वाले मुख्यमंत्री केजरीवाल दिल्ली वासियों को 24 मिनट के लिए भी साफ और स्वच्छ पानी नहीं दे रहे हैं। दिल्ली भाजपा केजरीवाल सरकार के दोहरे मापदंड और नकारात्मक नीतियों को मुखरता के साथ दिल्ली की जनता को अवगत कराएगी और उनके हितों के लिए संघर्ष करती रहेगी।
नेता प्रतिपक्ष रामवीर सिंह बिधूड़ी ने कहा कि मुख्यमंत्री केजरीवाल ने दिल्ली के लोगों से 24 घंटे जलापूर्ति, 2017 तक अनधिकृत कॉलोनियों में अंडर ग्राउंड सीवेज लाइन का काम पूरा करना और यमुना को साफ करने का वादा किया था, लेकिन इन वादों पर आज तक अमल नहीं किया गया। यमुना की सफाई के लिए केंद्र सरकार ने 400 करोड़ रुपए दिल्ली सरकार को दिए लेकिन आज तक यमुना की सफाई पर कोई खर्च नहीं किया गया। मुख्यमंत्री केजरीवाल बताएं कि  400 करोड़ रुपए अगर यमुना की सफाई के लिए खर्च नहीं किए गए तो कहां खर्च किए गए?

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