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 Latest News in india : दिल्ली के छोटे उद्यमी आशा और निराशा के बीच झूल रहे हैं

नैशनल थॉट्स ब्यूरो :- अगर सरकार ने फौरन ही मदद न दी तो हजारों इकाइयों को बंद करने की नौबत भी आ सकती है।कोरोना वायरस से निपटने के लिए लागू किए गए लाक डाउन की अवधि तीन मई के बाद समाप्त होने जा रही है। अभी यह तो नहीं पता कि तीन मई के बाद लाक डाउन से खत्म हो जाएगा या एक बार फिर से इसकी अवधि बढ़ाई जाएगी। इस सबके बीच दिल्ली के छोटे उद्यमी अपने भविष्य को लेकर आश और निराशा के बीच झूल रहे हैं।

आशा इस बात की है कि चालीस दिन के लाक डाउन की अवधि समाप्त होने के बाद घर से निकल कर अपने काम धंधे की ओर रुख करेंगे और साथ ही इतने लंबे समय से रुके हुए अपनी औद्योगिक इकाई के पहिए को चालू कर सकेंगे। निराशा इसकी कि अभी तक भी सरकार के स्तर पर उनके लिए किसी भी तरह के पैकेज की घोषणा की और न ही इस बात के कोई संकेत दिए हैं कि उन्हें आर्थिक मंदी से उबारने के लिए शीघ्र ही क्या कदम उठाए जा रहे हैं।

सरकार ने लाक डाउन के दौरान उद्यमियों को यह निर्देश तो दिए कि वे न तो अपने किसी कर्मचारी को नौकरी से निकालेंगे और न ही उनके वेतन में कोई कटौती करेंगे। मगर उसने यह नहीं सोचा कि यह सरकारी मदद के बिना यह उद्यमी अपना अस्तित्व कैसे बचा सकेंगे।

इस संबंध में नरेला चेंबर ऑफ इंडस्ट्रीज के महासचिव संजय गुप्ता ने नेशनल थाट्स से विषेश बातचीत करते हुए कहा कि लाक डाउन के कारण छोटे उद्यमियों की सारी पूंजी कर्मचारियों को वेतन देने और अपना घर खर्च चलाने में खत्म हो गई है । कुछ पैसे बाजार में भी फंसा हुआ है। जिसके जल्द ही वापस मिलने की कोई उम्मीद नहीं है। क्योंकि जिन लोगों ने माल खरीदा था उनकी भी हालत नाज़ुक ही है। उनके मुताबिक दिल्ली में में ज्यादा संख्या छोटे उद्योगों की है।

अगर सरकार ने इनकी ओर जल्द ही ध्यान नहीं दिया तो इनको चलाने वालों के सामने रोजी-रोटी का संकट पैदा हो जाएगा। इतना ही इनमें काम करने वाले भी बेरोजगारी का शिकार हो जाएंगे।उन्होंने छोटे उद्योगों को बचाने के लिए बिजली के फिक्सड चार्ज तुंरत माफ़ करने के साथ ही कम से कम तीन महीने तक के लिए केवल बिजली की खपत के मुताबिक बिल लेने की मांग की है।
इसके साथ ही उन्होंने उद्यमियों को सस्ती दर व आसान शर्तों पर बैंक या अन्य वित्तीय संस्थाओं से कर्ज दिलाने की मांग की। उन्होंने कहा कि उद्यमी नियमित रूप से अपने घर के साथ ही औद्योगिक इकाई का भी गृह कर जमा करवाते रहे हैं।

उनकी आर्थिक स्थिति को देखते हुए सरकार को कम से कम एक साल के लिए उनका यह कर समाप्त कर देना चाहिए। उन्होंने छोटे उद्योगों के हितों को ध्यान में रखते हुए उनके लिए शीघ्र ही नीति बना कर उसे लागू करना चाहिए।

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