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डिजिटल कविसम्मेलन : माँ के आशीर्वाद को बस तू अमृत जान

माटी की सुगंध संस्था के तत्वावधान में माँ विषय पर डिजिटल कविसम्मेलन आयोजित किया गया । जिसकी अध्यक्षता देश के प्रसिद्ध और प्रतिष्ठित साहित्यकार व कवि डॉ जयसिंह आर्य ने की। संचालन कवयित्री डॉ वीणा अग्रवाल गुरूग्राम ने किया । इस कविसम्मेलन में देश के विभिन्न शहरों के कवियों ने भाग लिया । मुख्य अतिथिथे शामली से पधारे कवि पवन कुमार ‘पवन ‘। अध्यक्षता कर रहे डॉ जय सिंह आर्य ने
माँ विषय पर काव्य पाठ करते हुए कहा कि माँ की महिमा अपरम्पार है माँ को यदि समझना है तो माँ ही बनना पड़ेगा ।

माँ का अर्थ जानने के लिए अपने पेट से चार किलो का पत्थर बांध कर छः महीने रह कर देखो तब माँ होने का अर्थ जान सकोगे । जब ईश्वर सब जगह उपस्थित नही हो सकते थे तब ईश्वर ने माँ को बनाया ।कवयित्री मोनिका शर्मा ने अपने सुमधुर कण्ठ से माँ सरस्वती की वंदना कर इस कविसम्मेलन का प्रारम्भ किया ।

अध्यक्षता कर रहे कवि डॉ जय सिंह आर्य ने दोहे में माँ का बखान करते हुए कहा:-

माँ के आशीर्वाद को बस तू अमृत जान । इस अमृत का हर घड़ी कर ले तू रसपान ।।
डॉ जय सिंह आर्य ने तुलसी माता की अपनी प्रसिद्ध रचना पढ़ते हुए कहा :-
हर मौसम में साथ निभाना तुलसी माँ। हर घर मे हो तेरा ठिकाना तुलसी माँ।।

कवि पवन कुमार ‘पवन ‘ने पढ़ा :-
माँ के आशीर्वाद से बन जाते सब काम ।माँ के चरणों मे समझ सारे तीर्थ धाम ।।

कवि डॉ सतीश वर्द्धन ने पढ़ा कि:-

कभी आंगन की मिट्टी से लिपट कर देख तो लेना।
कलेजे से पिताजी के चिपट कर देख तो लेना ।।
दर्द कैसा भी हो प्यारे बड़ा आराम आएगा। जरा माँ के तू आँचल में लिपट कर देख तो लेना ।।

कवि सुदेश यादव दिव्य ने पढ़ा कि :-

वही दुख माँ को देता है जिसे माँ पास रखती है।
उसी से दर्द कहती है उसी से आस रखती है ।
अगर बीमार हो जाये दवाई तक नही लाता।
माँ फिर भी उसकी खातिर उपवास रखती है।।

कवयित्री डॉ वीणा अग्रवाल ने पढ़ा:- कोई नही है इस दुनिया मे जो मां के जैसा प्यार दे ।
सारे दोष क्षमा कर दे और ममता अपनी वार दे।।

कवि हरेंद्र प्रसाद यादव फकीर ने पढ़ा:-
माँ की ममता कितनी प्यारी कितनी न्यारी होती है।
तेरे ही चरणों मे माता दुनिया सारी होती है।।

कवि डॉ जय प्रकाश मिश्र ने पढ़ा कि:-

उनका साथ हो न हो मगर अहसास होता है ।
लगता है कि साँसों में उन्ही का वास होता है।
मुसीबत के पर्वत भी वहीं पर सिर झुकाते हैं ।
जिसके शीश पर मां का आशीर्वाद होता है।

कवयित्री सीमा विजयवर्गीय(अलवर) ने पढ़ा कि डरी डरी सहमी रहती बूढ़ी माँ।
कोई बात नही करती है बूढ़ी माँ।
बेटे बहुत सयाने निकले हैं उसके । क्या कहना चुप ही रहती है बूढ़ी माँ ।।

कवि मनोज मिश्रा कप्तान ने पढ़ा कि:

एक दृष्टि में कहूँ तो सृष्टि के विकास हेतु आदि से ही अंत तक माँ तेरा उपकार है ।।

कवयित्री मोनिका शर्मा ने पढ़ा कि माँ तुमने मुझे इतने तजुर्बे से भर दिया ।जितनी मेरी उम्र न थी मुझे उतने का कर दिया ।

कवि गाफिल स्वामी,कवि तेजवीर त्यागीऔर कवि सुरेंद्र खास ने भी काव्य पाठ कर कविसम्मेलन को सार्थक बना दिया।कविसम्मेलन अध्यक्ष डॉ जयसिंह आर्य और मुख्य अतिथि पवन कुमार पवन ने सभी कवियों और श्रोताओ का आभार व धन्यवाद व्यक्त किया ।

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