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Enemy's enemy is friend
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दुश्मन का दुश्मन दोस्त होता है

चीन से खफा अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने प्रधानमंत्री मोदी को जी-7 में शामिल होने का न्यौता दिया।अमेरिका इस वक़्त हिंसा की आग में झुलस रहा है। जिसकी वजह से वहां के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की कड़ी आलोचना हो रही है। जबकि भारत भी कोरोना वायरस से निपटने के लिए लागू किए गए लाक डाउन के कारण आर्थिक मंदी और अन्य समस्याओं से जूझ रहा है। जिसे लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी चौतरफा दबाव में घिरते नजर आ रहे हैं। ऐसे समय में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को एक बार फिर से अपने भरोसेमंद दोस्त प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की याद आई है। उन्होंने दोनों देशों में मंडरा रहे संकट के बीच प्रधानमंत्री मोदी से फोन पर लंबी बातचीत करने के साथ ही उन्हें जी- 7 देशों के समूह में शामिल होने का न्यौता दिया है। इस तरह का निमंत्रण मिलने से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उनके समर्थकों को अपनी उपलब्धियों का गुणगान करने का एक बड़ा मौका मिल गया है।

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने प्रधानमंत्री मोदी के साथ लगभग आधा घंटे तक बातचीत की। इस दौरान दोनों नेताओं ने अमेरिका में फैली हिंसा, भारत-चीन सीमा पर तनाव,कोरोना वायरस महामारी और विश्व स्वास्थ्य संगठन ( डब्ल्यू एच ओ) में सुधार लाने जैसे मुद्दों पर चर्चा की।बातचीत के दौरान अमेरिकी राष्ट्रपति ने विस्तार कर उसमें भारत के साथ ही दक्षिण कोरिया,रूस और आस्ट्रेलिया जैसे देशों के शामिल होने पर बल दिया। उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी को इस समूह के अमेरिका में होने वाली बैठक में शामिल होने का न्यौता भी दिया। दरअसल डोनाल्ड ट्रंप की मंशा जी- 7 देशों के समूह का विस्तार करके जी-20 देशों के समूह के महत्व को कम करने की है।जिसका चीन एक अहम सदस्य है।

प्रधानमंत्री मोदी ने डोनाल्ड ट्रंप की राय की सराहना करते हुए दोनों देशों के साथ मिलकर काम करने की बात कही है। उन्होंने इस संबंध में ट्वीट भी किया है।अंतरराष्ट्रीय कूटनीति के जानकारों के मुताबिक अमेरिका में कोरोना वायरस की महामारी के भीषण रूप अख्तियार करने से अब तक लाखों लोग इसकी चपेट में आ चुके हैं और एक लाख से अधिक लोगों की मौत हो गई है। अमेरिका ने शुरू से ही चीन पर कोरोना वायरस का संक्रमण फैलाने का आरोप लगाने के साथ ही उसके खिलाफ आक्रमक रवैया अपनाया हुआ है। दूसरी तरफ लद्दाख में चीनी सैनिकों की गतिविधियां तेज होने की वजह से भारत के साथ उसके संबंध तनावपूर्ण हो गए हैं। ऐसे में अमेरिका और भारत चीन के खिलाफ दुश्मन का दुश्मन दोस्त होता है कि नीति पर चलते हुए उसे मात देने के लिए उसकी घेराबंदी करने में जुट गए हैं।

अंतरराष्ट्रीय राजनीति के जानकार यह भी मान रहे हैं कि अमेरिका में एक पुलिस अधिकारी के हाथों एक अश्वेत व्यक्ति की मौत हो जाने के बाद से वहां जिस प्रकार से हिंसा फैली हुई है, उससे लोगों खासकर अश्वेत समुदाय में डोनाल्ड ट्रंप के खिलाफ जबरदस्त नाराजगी पैदा हो गई है। डोनाल्ड ट्रंप राष्ट्रपति पद का चुनाव दुबारा से लड़ना चाहते हैं। ऐसे में अश्वेत समुदाय की नाराज़गी उन पर भारी पड़ सकती है। इसी को ध्यान में रखते हुए ही उन्होंने भारत को जी-7 देशों के समूह में शामिल करने का दांव चला है। ताकि वह प्रधानमंत्री मोदी के साहरे अमेरिका में रहने वाले भारतीय मूल के मतदाताओं के साथ ही एशिया के दूसरे मतदाताओं को भी अपने पक्ष में कर सकें।

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