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पिता की छत्रछाया :- हरेन्द्र प्रसाद यादव "फ़कीर"
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पिता की छत्रछाया :- हरेन्द्र प्रसाद यादव “फ़कीर”

पिता भगवान की ऐसी नेमत है जिसके छत्रछाया में हम सब पल-बढ़ कर कुछ बनने का सपना देखते हैं, पिता हम सब की आन बाण और शान का प्रतिक होते हैं, हर बेटा अपने सफल पिता के नक़्शे कदम पर चलकर नाम कमाना चाहता है, हर अच्छे पिता की बेटी चाहती है कि उसका पति बहुत धनवान और बुद्धिमान नहीं तो कम से कम उसके पिता जैसा सफल इंसान हो/ पिता का स्थान भगवान सामान ही है, इसलिए हम सब को अपने पिता की बातों और आज्ञा का अनुशरण करना चाहिए।

प्रस्तुत है पिता के प्यार को समर्पित एक काव्यात्मक गीत।

आन पिता जी शान पिता जी।
बच्चों के अभिमान पिता जी।।
जिनके हाथ सनाथ है जीवन।
होते हैं भगवान पिता जी।।

दूर से आना पास बुलाना।
सुख दुख में हर पल मुस्काना।।
बच्चों की खुशियों की खातिर।
अपनी खुशियां बली चढ़ाना।।

मेरे आगे और नहीं कुछ।
आपके हैं अरमान पिता जी।।
आन पिता जी शान पिता जी।
बच्चोंं के अभिमान पिता जी।।

मुझसे कभी न दूरी करते।
हर ज़िद मेरी पूरी करते।।
काम सभी ही छोड़ पिता जी।
मेरा काम ज़रूरी करते।।

मेरी इक मुस्कान के आगे।
हो जाते क़ुर्बान पिताजी।।
आन पिता जी शान पिता जी।
बच्चों के अभिमान पिता जी।।

मैं भी इक दिन पिता बनूंगा।
पिता के पदचिन्हों पे चलूंगा।।
जो सुख मैनें उनसे पाया।
वही मैं उनको वापस दूंगा।।

भेजूंगा नहीं वृद्धाश्रम में।
जब तक तन में प्राण पिताजी।।
आन पिता जी शान पिता जी।
बच्चों के अभिमान पिता जी।।

कवि गीतकार : हरेन्द्र प्रसाद यादव “फ़कीर”

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