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Female soldier Seema Dhaka set a unique example of dedication to service
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सेवा के प्रति समर्पण की अनूठी मिसाल पेश की महिला सिपाही सीमा ढाका

समयपुर बादली थाने में तैनात महिला सिपाही सीमा ढाका ने सेवा के प्रति समर्पण की अनूठी मिसाल पेश की हैढाई माह यानी 75 दिन में 76 लापता बच्चों को ढूंढकर उनके परिवारों से मिलवाया है। उनकी अनूठी सेवा को देख पुलिस आयुक्त एसएन श्रीवास्तव ने सीमा को  (आउट ऑफ टर्न प्रमोशन) दी है। अब वह एएसआई बन गई हैं।

सीमा ढाका दिल्ली पुलिस की पहली ऐसी पुलिसकर्मी बन गई हैं, जिन्हें लापता बच्चों को ढूंढने पर आउट ऑफ टर्न प्रमोशन दिया गया है। बारी से पहले तरक्की पाकर हवलदार से एएसआई बनी सीमा ढाका पुलिस महकमे में काफी प्रशंसा हो रही है।

दिल्ली पुलिस के प्रवक्ता डॉ. ईश सिंघल ने बताया कि सीमा ढाका ने जिन 76 लापता बच्चों को ढूंढा है, उनमें से 56 बच्चे 14 वर्ष से कम उम्र के हैं। हवलदार सीमा ने न केवल दिल्ली में लापता बच्चों को ढूंढा है, बल्कि पंजाब व पश्चिमी बंगाल से भी लापता बच्चों को ढूंढा है।

दिल्ली पुलिस आयुक्त समेत अन्य पुलिसकर्मियों को मानना है कि इस तरह बारी से पहले तरक्की मिलने पर अन्य पुलिसकर्मियों को उत्साह बढ़ेगा और लापता बच्चे अधिक संख्या में ढूंढे जा सकेंगे।
प्रवक्ता ने बताया कि दिल्ली पुलिस आयुक्त ने पांच अगस्त को गायब बच्चों को ढूंढने वाले पुलिसकर्मियों को बारी से पहले तरक्की और असाधारण कार्य पुरस्कार देने की घोषणा की थी।

इसके तहत जो सिपाही व हवलदार एक वर्ष में 14 वर्ष से कम उम्र के 50 या उससे अधिक लापता बच्चों को ढूंढेगा उसे बारी से पहले तरक्की दी जाएगी। जो सिपाही व हवलदार कम से कम 15 बच्चों को ढूंढेगा उसे असाधारण कार्य पुरस्कार दिया जाएगा।

 

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