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भारत में स्थित एक ऐसा मंदिर जहां कुत्तों की पूजा की जाती है, जाने इसके पीछे की कहानी

भारत देश में कई धर्मो के लोग एक साथ मिलकर रहते हैं| यही कारण है जो भारत को एक अनोखा देश बनाता है| यहां सभी धर्मों में अलग-अलग मान्यताएं हैं| यहां हर राज्य मैं लोगों की भाषाएं अलग हैं| यहां कई राज्य ऐसे भी है जहां एक साथ कई भाषाओं का प्रयोग किया जाता है| हिंदू धर्म में देवी देवताओं को लेकर हर किसी की अलग-अलग मान्यताएं हैं| भारत में प्राचीन मंदिरों की भी कोई कमी नहीं है| आज हम आपको एक ऐसे ही मंदिर के बारे में बताने जा रहे हैं जहां पर कुत्तों की पूजा की जाती है| इस मंदिर को कुकुर देव मंदिर के नाम से जाना जाता है|
कहां स्थित है यह मंदिर ?
कुकुरदेव मंदिर छत्तीसगढ़ के रायपुर से करीब 132 किलोमीटर दूर दुर्ग जिले की खबरें गांव में स्थित है| इस मंदिर के गर्भ गृह में शिवलिंग के साथ कुत्ते की प्रतिमा भी स्थापित है|
सावन के महीने में लग जाता है भक्तों का जमावड़ा
शिव जी की प्रतिमा होने के कारण यहां सावन के महीने में मंदिर आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ जाती है| इसको लेकर सभी लोगों की मान्यताएं अलग-अलग है| कोई कहता है कि मंदिर के दर्शन मात्र से कोई भी कुत्ता नहीं काटता है| किसी की मान्यता है कि यहां इन प्रतिमाओं की पूजा करने से कुकुर खांसी से बचा जा सकता है| यह मंदिर 200 मीटर के दायरे में सिमटा हुआ है| मंदिर के प्रवेश द्वार पर ही दोनों और कुत्तों की प्रतिमा है| यहां लोग कुत्तों की पूजा भी वैसे ही करते हैं जैसे कि शिव मंदिरों में नंदी बैल की की जाती है| शिवरात्रि के दौरान यहां ज्योति भी जलाई जाती है जिससे माना जाता है कि श्रद्धालु की सभी कामनाएं पूरी होती हैं| यहां पर गणेश भगवान की 2 फीट ऊंची मूर्ति भी मौजूद है|
इस मंदिर का निर्माण और रहस्य की कहानी
इतिहासकारों के मुताबिक इस मंदिर का निर्माण 13वीं शताब्दी के नागवंशी राजाओं ने करवाया था| इसके पीछे के कारण यह है कि मंदिरों के गुंबद के चारों दिशाओं पर नागों के चित्र बने हुए हैं लेकिन यह आज भी स्पष्ट नहीं है कि इस मंदिर को किसने बनवाया था| इस मंदिर का नाम सुनते ही आपको पता लग गया होगा कि यह मंदिर किसी कुत्ते की याद में बनाया| जी हां यह मंदिर एक वफादार कुत्ते का स्मारक है| गांव के लोगों का कहना है कि यहां कुछ सदियों पहले एक बंजारा अपने परिवार के साथ रहने आया था| उसके साथ एक कुत्ता भी था। गांव में एक बार अकाल पड़ गया तो बंजारे ने गांव के साहूकार से कर्ज लिया, लेकिन वो कर्ज वो वापस नहीं कर पाया। ऐसे में उसने अपना वफादार कुत्ता साहूकार के पास गिरवी रख दिया। एक रात साहूकार के घर चोरी हो गई। सुबह हुई तो कुत्ता साहूकार की धोती मुंह में दबाकर खींचते हुए उसे वहां तक ले गया जहां चोरों ने चोरी का माल जमीन में गाड़ दिया था। गड्ढा खोदने पर साहूकार को सारा माल मिल गया। कुत्ते की वफादारी से खुश होकर साहूकार ने उसे आजाद कर देने का फैसला लिया।
लेकिन इसके बाद एक दर्दनाक घटना बताई जाती है कि साहूकार ने उसे छोड़ते वक्त एक चिट्ठी लिखी और कुत्ते के गले में लटकाकार उसे बंजारे के पास भेज दिया। इधर कुत्ता जैसे ही बंजारे के पास पहुंचा, उसे लगा कि वो साहूकार के पास से भागकर आया है। इसलिए उसने गुस्से में आकर कुत्ते को पीट-पीटकर मार डाला। हालांकि, बाद में बंजारे ने कुत्ते के गले में लटकी साहूकार की चिट्ठी पढ़ी तो वो हैरान हो गया। उसे अपने किए पर बहुत पछतावा हुआ।
उसके बाद उसने उसी जगह कुत्ते को दफना दिया और उस पर स्मारक बनवा दिया। स्मारक को बाद में लोगों ने मंदिर का रूप दे दिया, जिसे आज लोग कुकुर मंदिर के नाम से जानते हैं।

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