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Hindi hai hum watan hai Hindustan hamara - special on Hindi day
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हिंदी है हम वतन है हिंदुस्तां हमारा- हिंदी दिवस पर विशेष | Hindi Diwas 2019

भारत एक ऐसा देश है जहाँ विभिन्नताओं का भंडार है। ये विभिन्नताएँ धर्म, जाति, बोली, भाषा, वर्ग, वेशभूषा खानपान आदि चीजों में देखी जाती है। भारत को अगर विभिन्नताओं से परिपूर्ण देश कहा जाए तो कोई अतिश्योक्ति नहीं होगी। परिपूर्ण इसलिए क्योंकि हमारी विभिन्नताएँ ही विश्व में भारत को सबसे अनोखा देश बनाती है।  जहाँ आज हर तरफ अंग्रेजी भाषा का प्रचलन है तो वहीं अन्य देश हिन्दी सीखने और समझने के लिए लालायित। 14 सितंबर को हिंदी दिवस के रूप में मनाया जाता है। पौराणिक काल से ही हिन्दी चली आ रही है पर आज भी हिंदी को हिंदुस्तान में वह दर्जा नहीं मिला जो इसे मिलना चाहिए। क्यों न इस हिंदी दिवस हम हिंदी को वह दर्जा दिलाने की कोशिश करें जो एक हिंदुस्तानी होने के नाते हम सबका फर्ज है। अपनी भाषा को सबसे पहले प्राथमिकता दें फिर अन्य भाषाओं को सीखने और समझने की चेष्टा रखें। 

देश-विदेश में हिंदी की स्थिति
हिंदी भाषा विश्व की प्राचीन, समृद्ध और आसानी से समझ आने वाली भाषा है। हिंदी भारत के अलावा दुनिया के कई देशों में बोली जाती है। हिंदी, हिंदुस्तान की 'राजभाषा' है। भाषाओं का इतिहास रखने वाली संस्था एथ्नोलॉग के अनुसार हिंदी दुनिया में सबसे ज्यादा बोली जाने वाली तीसरी भाषा है। 14 सितंबर 1949 को संविधान सभा ने एक मत से यह निर्णय लिया कि हिंदी ही भारत की राजभाषा होगी। इस निर्णय के बाद हिंदी को हर क्षेत्र में प्रसारित करने के लिए राष्ट्रभाषा प्रचार समिति, वर्धा के अनुरोध पर 1953 से पूरे भारत में 14 सितंबर को हर साल हिंदी दिवस के रूप में मनाया जाने लगा। लेकिन ये भारत का दुर्भाग्य ही है कि आज हिंदुस्तान में ही हिन्दी भाषा के लिए विरोध हो रहे है। दक्षिणी भारत में हिंदी का प्रचलन काफी कम है साथ ही यहाँ के निवासी भी हिंदी के प्रति खुद को पूरी तरह आत्मसमर्पित कर पाने में सक्षम नहीं है। 

आज बेशक हम अपने देश में हिंदी को उतना महत्व न देते हो पर भारत की सरजमी से दूर बसें भारतीय किसी अन्य को हिंदी में बोलते सुन खिल उठते है। हिन्दी में बात करते ही वह समझ जाते है कि यह भी हिंदुस्तानी है। फर्क नहीं पड़ता आप भारत के किस राज्य में रहते हो, किस धर्म को मानते हो या आपकी जाति क्या है। उस क्षण आपकी पहचान केवल हिंदुस्तानी है। देश से दूर हर व्यक्ति को कहीं न कहीं अपनी भाषा पर नाज़ होता है लेकिन देश में रह रहें लोगों को अन्य देशों की भाषाओं से अत्याधिक प्यार होता है। सबकुछ सीखने की चाह में हम हिंदी भाषा से बहुत दूर हो जाते है। वहीं विदेशी हिंदी भाषा को आत्मसात करने की क्लासेज लेकर गूगल भी हिन्दी भाषा के व्यापक स्तर पर काम करने की जुगत में है। 
हिंदी दिवस का महत्व 
आज बेशक हम कई सारी भाषाओं पर महारत हासिल करना चाहते है। जिसमें इंग्लिश बोलना हमारी सबसे बड़ी प्राथमिकता होती है लेकिन क्या यह सच नहीं है कि बहुत कुछ सीखने की चाह में हमने अपने वजूद से बहुत ज्यादा दूरी बना ली है। आज हमारे देश कई लोग है जो खुद को हिंदुस्तानी बोलते है पर हिंदी नहीं बोल पाते। आप उनसे अंग्रेजी में चाहे कितनी फर्राटेदार बोलते है पर हिंदी बोलना उनके बस की नहीं। ये कैसी प्रसिद्धि है जिसमें हम अपनी बुनियाद से दूरी बनाकर महलों को सजाना चाहते हो। साल का यह एक दिन हमें हमारी असली पहचान की याद दिलाता है और बताता है कि आज भी हम हिंदी से किस कदर जुड़े है। 
एक भारतीय चाहे कितनी भाषा में ही संवाद क्यों न कर लें लेकिन जब वह हिंदी बोलता है तो उसकी भाषा में आत्मीयता और उस एहसास की झलक होती है जो किसी को सुनने पर मजबूर करता है। दुनिया की हर भाषा अच्छी है और उन्हें सीखने में कोई बुराई नहीं लेकिन यहाँ सबसे पहली अनिवार्यता अपनी नींव को मजबूत करने की है। ताकि हम अपनी संस्कृति और मूल्यों का एहसास अपनी भाषा के साथ संजोए रखें।  
हिंदी दिवस और  14 सितंबर का उत्सव
14 सितंबर को स्कूलों, कॉलेजों कार्यालयों के साथ-साथ राष्ट्रिय स्तर पर भी हिन्दी दिवस बड़े ही हर्षो-उल्लास के साथ मनाया जाता है। इस उपलक्ष्य में देश के राष्ट्रपति उन लोगों को पुरस्कार देते हैं जिन्होंने हिंदी भाषा के किसी भी क्षेत्र में उत्कृष्टता प्राप्त की है। कई बड़े मंचों पर हिंदी वाद-विवाद , कविता और कहानी बोलने की प्रतियोगिताएं भी रखी जाती हैं।
ऐसे कई आयोजन होते है जिनमें हिन्दी के प्रख्यात व्यक्ति संस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन कर हिंदी दिवस के महत्व को समझाने के लिए भाषण देते हैं। हिंदी दिवस को कई कार्यालयों और सरकारी संस्थानों में भी मनाया जाता है। इस अवसर पर ऐसे कार्यक्रमों में महिलाएं और पुरूष भारतीय परिधान में रंगारंग होकर कार्यक्रम का आयोजन करते है। 

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