नैशनल थॉट्स /आलोक ग" />
Hindi News, हिंदी समाचार, Samachar, Breaking News, Latest Khabar
How much more will fall in politics
Blog Breaking News

राजनीति में और कितना नीचे गिरेंगे

नैशनल थॉट्स /आलोक गौड़ :- पूरा देश इस समय कोरोना वायरस के महासंकट से जूझ रहा है। बेरोजगारी और भुखमरी का शिकार हुए लाखों मजदूर पलायन कर अपने घर लौटने की कोशिश कर रहे हैं। हजारों किलोमीटर पैदल चलने वालों पर राज्यों की पुलिस लाठियां भांजकर और उन्हें अन्य तरह के दंड देकर अपनी बहादुरी का परिचय दे रही है। सड़क पर पैदल चलने वाले मजदूरों की दयनीय हालत देखकर किसी भी संवेदनशील व्यक्ति की आंखों में आंसू आ जाते हैं। मगर इस स्थिति में भी अगर किसी का दिल नहीं पसीजता है तो वह हैं हमारे देश के भाग्य विधाता (राजनेता)। वह ऐसी स्थिति में भी अपनी राजनीतिक रोटियां सेंकने से बाज़ नहीं आ रहे हैं।

बेहद विकट परिस्थितियों में अपनी और अपने परिजनों की जान संकट में डाल कर पैदल चलकर अपने घर लौटने वालों की मदद करने के लिए कांग्रेस की महासचिव एवं उत्तर प्रदेश की प्रभारी प्रियंका गांधी वाड्रा ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से एक हजार बसों को दिल्ली से राज्य के विभिन्न हिस्सों में जाने की अनुमति देने का अनुरोध किया था। तुरंत अनुमति देने के बजाय उत्तर प्रदेश सरकार के एक अधिकारी ने आधी रात के बाद कांग्रेस महासचिव को ईमेल भेज कर उनसे सभी एक हजार बसें चेकिंग के लिए सुबह दस बजे तक लखनऊ भेजने का फरमान सुनाया। जब प्रियंका गांधी वाड्रा ने इसे पूरी तरह से अव्यवहारिक बताते हुए कहा कि ऐसा करना संभव नहीं है।

बाद में उनसे सभी बसों के नंबर, उनके ड्राइवर व कंडक्टर और अन्य जानकारी मुहैया कराने को कहा गया। जब उनकी ओर से मांगी गई सारी जानकारी दे दी गई। तो बाद में यह कहा गया कि जिन बसों के नंबर दिए गए हैं। उनमें से कुछ दूसरे वाहनों के हैं। इतना ही नहीं इस मामले में प्रियंका गांधी वाड्रा के निजी सचिव के खिलाफ पुलिस में धोखाधड़ी के मामले में एफआईआर दर्ज कराई गई है। उत्तर प्रदेश सरकार के गैर जिम्मेदाराना रवैए के खिलाफ धरना देने वाले प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अजय कुमार लल्लू को भी हिरासत में ले लिया गया है ।

सवाल यह उठता है कि उत्तर प्रदेश सरकार को बसों की फिटनेस कराने पर जोर देने के साथ ही अन्य जानकारी मांगने की क्या जरूरत थी। दूसरे अगर यह मान भी लिया जाए कि प्रियंका गांधी वाड्रा के निजी सचिव की ओर से बसों के नंबर की जो सूची भेजी गई थी, उसमें से यदि गलती से फिर जान बूझकर ही कुछ दूसरे वाहनों के नंबर दिए गए थे। तो उन्हें छोड़ कर शेष बसों को मजदूरों सहित राज्य में आने की अनुमति दे देनी चाहिए थी।

सवाल यह भी उठता है कि बसों के गलत नंबर देकर कांग्रेस महासचिव के निजी सचिव ने उत्तर प्रदेश सरकार से उनकी एवज में बसों का किराया वसूल करने का तो प्रयास नहीं किया था। जो उनके खिलाफ धोखाधड़ी के मामले में एफआईआर दर्ज कराई गई है। इसका सीधा सा अर्थ तो यह ही निकलता है कि उत्तर प्रदेश की योगी सरकार अपनी नाकामी को छुपाने के लिए विपक्ष की आवाज को दबाने का प्रयास कर रही है।

Related posts