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I may be lacking, but trust in the country remains: PM Modi
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मुझमें कमी हो सकती है, पर देश पर भरोसा कायम: पीएम मोदी

नैशनल थॉट्स /आलोक गौड़:-  प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में बनी भारतीय जनता पार्टी सरकार के दूसरे कार्यकाल का एक साल शनिवार को पूरा हो गया है। इस मौके पर उन्होंने एक चिट्ठी लिखकर देशवासियों के प्रति आभार जताया है।इस चिट्ठी की शुरुआत में में उन्होंने लिखा है कि कोरोना महामारी के कारण इस वक्त ऐसी परिस्थितियां नहीं है कि वह लोगों से रूबरू होते हुए उनका आशीर्वाद प्राप्त कर सकें। इसीलिए उन्हें पत्र लिखना पड़ा है।इस चिट्ठी में प्रधानमंत्री मोदी ने अपने चिर-परिचित अंदाज में अपनी सरकार के पहले कार्यकाल और दूसरे कार्यकाल की उपलब्धियों का गुणगान किया है। उन्होंने लिखा है कि सरकार के एतिहासिक फैसलों के कारण देश अभूतपूर्व गति से आगे बढ़ा है। अभी भी देश के सामने चुनौतियां हैं और बहुत कुछ करना बाकी है।

मगर पिछले कुछ समय से खासकर कोरोना महामारी के कारण लागू किए गए लाक डाउन और इस दौरान लाखों भूखे -प्यासे मजदूरों के हजारों किलोमीटर पैदल चलकर अपने राज्य वापस लौटने का प्रयास करने , अर्थव्यवस्था की दयनीय स्थिति और बढ़ती हुई बेहताशा बेरोजगारी के कारण देश में पैदा हुए असंतोष व नाराजगी को देखते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इन सभी मुद्दों पर सफाई देने के बजाय बड़ी चालाकी के साथ यह कहा है कि मुझमें कमी हो सकती है लेकिन देश में कोई कमी नहीं है। इसीलिए मेरा विश्वास खुद से ज्यादा आप पर है। आपकी शक्ति व सामर्थ्य पर है।

अपनी इस चिट्ठी में प्रधानमंत्री मोदी ने उन मुद्दों और सरकार की कमियों का कोई जिक्र नहीं किया है और न ही भविष्य की योजनाओं का खाका खींचा है। इसके बजाय उन्होंने एक मंझे हुए राजनेता की तरह लोगों को भावनात्मक रूप से प्रभावित करने का प्रयास किया है।
इस चिट्ठी में प्रधानमंत्री मोदी ने कहा है कि साल 2014 के आम चुनाव में जनता ने देश की नीति और रीति बदलने के लिए वोट दिया था। उन पांच वर्षों में देश को व्यवस्थाओं को जड़ता व भ्रष्टाचार की दलदल से बाहर निकलते देखा है। इस चिट्ठी में प्रधानमंत्री मोदी ने जम्मू-कश्मीर से धारा 370 को समाप्त कर राज्य को दो विभाजित कर दो केंद्र शासित प्रदेशों में तब्दील करने, अयोध्या में श्रीराम मंदिर के निर्माण और मुस्लिम महिलाओं के लिए तीन तलाक़ की कुप्रथा समाप्त करने का जिक्र भी किया है।

मगर नोटबंदी और वस्तु एवं सेवा कर ( जीएसटी) करने के कारण अर्थव्यवस्था पर पड़ने वाले विपरीत असर और नागरिकता संशोधन कानून लागू करने की वजह अल्पसंख्यक समुदाय में पैदा हुए असंतोष के बारे में एक शब्द भी नहीं कहा है।उन्होंने देश को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में काम करने पर जोर देते हुए कहा है कि कोरोना संकट के समय में 20 लाख करोड़ रुपए का पैकेज इसीलिए दिया गया है। जिससे लोग अपने पैरों पर खड़े होकर अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने में अपना योगदान दे सकें।

 

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