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हम आवाज उठा ही लेंगे आज नही तो कल
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अंतरराष्ट्रीय मजदूर दिवस: हम आवाज उठा ही लेंगे आज नही तो कल-डॉ जय सिंह आर्य

ऑनलाइन  भव्य कवि सम्मेलन

अंतरराष्ट्रीय मजदूर दिवस के उपलक्ष्य में संस्था (माटी की सुगंध) के तत्वावधान में एक आन लाइन डिजिटल कविसम्मेलन का आयोजन किया गया। जिसकी अध्यक्षता देश के वरिष्ठ और सुप्रसिद्ध कवि डॉ जय सिंह आर्य ने किया।
मुख्य अतिथि रहे सुप्रसिद्ध छंद शिल्पी डा. कृष्ण कुमार नाज़, विशिष्ठ अतिथि रहे सुप्रसिद्ध गीतकार व पत्रकार श्री सुदेश यादव दिव्य, ग़ज़लकार श्री हेमंत शर्मा “दिल” ने कवि सम्मेलन को अपना सानिध्य प्रदान किया। कवि सम्मेलन के संचालक रहे गीत व ग़ज़लकार श्री हरेन्द्र प्रसाद यादव ” फ़कीर”।
अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में डॉ जय सिंह आर्य ने कहा कि एक मजदूर के ख़ून और पसीने से संसार का ढांचा खड़ा है। मजदूर अपनी मेहनत और परिश्रम से बड़े बड़े महल, बंग्ले, कोठियां और अन्य उपयोगी वस्तुओं का निर्माण करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं, परंतु एक मजदूर कल भी परेशान था आज भी परेशान है। कवि सम्मेलन का शुभारंभ नजीबाबाद की कवियत्री डॉ मंजू जौहरी ने सरस्वती वंदना कर किया।
कवि सम्मेलन की अध्यक्षता कर रहे डॉ जय सिंह आर्य ने अपनी रचना से सबका मन मोह लिया।
उनकी रचना के बोल थे—–

अपनी पहचान बना ही लेंगे आज नही तो कल।
मंजिल को अपनी पा ही लेंगे आज नही तो कल ।।
चुप्पी के आदेश तुम्हारे हमको हैं मंजूर नही ।
हम आवाज उठा ही लेंगे आज नही तो कल ।।

मुरादाबाद से देश के वरिष्ठ और प्रसिद्ध शायर कृष्ण कुमार नाज़ ने अपना कलाम यूं पढ़ा ——

जो खुद उदास हो वो क्या खुशी लुटायेगा।
बुझे हुए दीये से दीया किस तरह जलायेगा।।
कमान खुश है कि उसका तीर कामयाब रहा।
मलाल भी है कि अब लौट कर न आयेगा।।

पिलखुवा से कवि डॉ सतीश वर्द्धन ने मजदूर की पीड़ा अपने शब्दों में यूं व्यक्त किया ——

मेरी किस्मत सदा मुझसे रूठकर दूर रहती है।
मगर मेहनत-लगन मेरी सदा मशहूर रहती है।।
तुम्हारे महल,बंग्लो की चमक सब मेरे दम से है।
दुनिया श्रम के कारण ही मुझे मजदूर कहती है।।

मेरठ से श्रंगार रस के प्रसिद्ध कवि और शायर डॉ सुदेश यादव दिव्य ने अपनी छन्दात्मक कविता से सबक मन मोह लिया उन्होंने पढा कि ———–

सेवा त्याग परिश्रम की तू ही प्रतिमूर्ति है, तेरी सादगी ने इतिहास रच डाला है।
लाख आंधी तूफां आये तू न कभी घबराये, तेरे काम करने का ढंग ही निराला है।

दिल्ली से रूमानी अंदाज के शायर एच के शर्मा ‘दिल’ ने अपने कलाम से सबका मन जीत लिया, उनका कलाम था —————

जो दूसरों का दर्द बढाने में लगे हैं।
अपने सभी काम वो छुपाने में लगे हैं।।
उनसे बड़ा कोई नही गद्दार है यारों।
गद्दार जो सभी को बताने में लगे हैं।।

संचालन कर रहे हरेंद्र यादव ने पढ़ा कि

किसी मजदूर को तुम अब मजे से दूर मत करना।
कभी खूद को बना मालिक नशे में चूर मत करना।।
बिना मजदूर के मालिक कोई भी बन नहीं सकता।
किसी को भी बना मजदूर तुम मजबूर मत करना।।
कवि सुरेंद्र खास ने अपने खास अंदाज में कव्य पाठ किया ——
सिलसिला है सदियों का हर सितम मंजूर हूँ मैं।
अनवरत सहता रहूंगा क्यों कि एक मजदूर हूँ मैं ।।

नजीबाबाद से डॉ मंजू जौहरी की कविता भी खूब सराही गयी उनकी कविता के बोल थे —–

मजदूर हूँ बेबस हूँ मजबूर हूँ।
हैं मैं मजदूर हूँ।
ईश्वर की कृपा से दूर हूँ।
हैं मैं मजदूर हूँ।

अलीगढ़ से फ़कीरी मिजाज के प्रसिद्ध और वरिष्ठ कवि ने अलग अंदाज में मजदूर की व्यथा रखी जिसे बहुत वाह वाह मिली उनकी कविता थी कि ——–

मेहनत करता रात दिन रहा मजे से दूर।
श्रम जीवी इंसान का नाम पड़ा मजदूर।।

शामली से गम्भीर और समसामयिक विषयो के प्रतिष्ठित लेखक, कवि और शायर प्रदीप मायूस ने अपनी रचना से सबको भाव विभोर कर दिया उनकी रचना थी ———

आह भरते हैं चीखते हैं दर्द से चिल्लाते हैं ।
रात को जब भूखे पेट बच्चे अकुलाते हैं।।

कवि तेजवीर त्यागी ने अपना मर्म अपनी कविता में कुछ यूं बयां किया ——- सी ए ए कानून को हौआ रहे बताय।
देने का कानून है लेने का कछु नाय।।

कवयित्री डॉ श्वेता त्यागी ने गजल पढ़ते हुए कहा ——

काम लो सच्चाई का बदगुमानियाँ छोड़ो।
जो डरायेगा रातों को वो कहानियां छोड़ो।।

आवाज के जादूगर कवि और एंकर विनोद पाराशर की कविता के बोल थे—–

जैसे ही आयी पहली जनवरी दिमाग मे मच गयी खलबली।
सोचा लोगों दें नव वर्ष की शुभकामनाये, देखें क्या हैं लोगों की प्रतिक्रियाएं।

अलीगढ़ से हास्य कवि पाड़ी अलीगढ़ी ने अलमस्त अंदाज में अपनी कविता पढ़ते हुए कहा कि ——–

विश्व पर तो आ गयी संकट घड़ी,
आदमी की जान आफत में पड़ी।
हर तरफ बैठा कोरोना का कहर,
घर मे रहना ही सुरक्षा है बड़ी।।

कवि श्री गाफिल स्वामी जी अपने बेहतरीन दोहे पढ़े जो इस प्रकार थे—-

मेहनत करता रात दिन, रहा मजे से दूर।
श्रमजीवी इन्सान का, नाम पड़ा मजदूर।।

कविसम्मेलन के अंत मे डॉ जय सिंह आर्य और मुख्य अतिथि कृष्ण कुमार नाज़ ने सभी कवियों का आभार व धन्यवाद व्यक्त किया ।

रिपोर्टिंग
डॉ सतीश वर्द्धन
पिलखुवा 99271974 80

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