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“यह सब बीत जाएगा” तो किस बात का घमंड या गर्व

भारत में हिंदी कहानियों का इतिहास बेहद पुराना है| सदियों से भारत में कहानियां बोली, सुनी और लिखी जाती रही हैं| ऐसी ही एक प्रसिद्ध कहानी के बारे में हम आपको बताने जा रहे हैं| जिससे कि हमें जीवन में बहुत बड़ी सीख मिलती है :-
एक विशाल प्रदेश के सम्राट ने अपने सभा के सारे बुद्धिमानों को बुलाया और उनसे कहा – मैं कुछ ऐसे सुत्र चाहता हूं, जो छोटा हो लेकिन जीवन में हर मुश्किल में काम आए, बड़े शास्त्रों को पढ़ने का मेरे पास समय नहीं है| मुझे एक ऐसा सूत्र चाहिए जो एक वचन में पूरा हो जाये और जो हर मुश्किल परिस्थितियों में काम आये। दूख हो या सुख, जीत हो या हार, जीवन हो या मृत्यु सब में काम आये, इसलिए तुम सभी लोग ऐसा सूत्र खोज कर मेरे पास लाओ |
उन सभी बुद्धिमानों व्यक्तियों ने बड़ी मेहनत की लेकिन उन्हें ऐसा सूत्र नहीं मिल पाया | कुछ समय बाद वे आपस में बात कर रहे थे, एक ने कहा- हम बडी मुश्किल में पडे हैं बड़ा विवाद है, संघर्ष है , कोई निष्कर्ष नहीं निकल पा रहा है | उनमें से एक व्यक्ति ने कहा कि मैंने सुना हैं एक सूफी फकीर गांव के बाहर ठहरा है वह बहुत बुद्धिमान व्यक्ति है, क्यों न हम उसी के पास चलें ?
वे सभी लोग उस सुफी फकीर के पास पहूंचे, उन्होंने दरबार में गठित सत्र को लेकर पूरी बात उसे विस्तार से बताएं | इसके बाद उन्होंने एक अंगुठी पहन रखी थी | फकीर ने वह अंगूठी निकालकर सम्राट को देने की बात कही | इसके बाद उन्होंने बताया कि उनसे कहना इस पत्थर के नीचे एक छोटा सा कागज रखा है, उसमें सुत्र लिखा है, वह मेरे गुरू ने मुझे दिया था, मुझे तो जरूरत भी न पडी इसलिए मैंने अभी तक खोलकर देखा भी नहीं | हमारी मांगे ही हमारे दुःख का कारण हैं, उन्होंने अंगूठी देने के बाद उन सभी बुद्धिमान लोगों के सामने एक शर्त रखी थी कि जब किसी मुश्किल परिस्थिति में कुछ उपाय न रह जायें, सब तरफ से निरूपाय हो जाओं, तब इसे खोलकर पढ़ना | वह लोग वहां से जा ही रहे थे कि उस फकीर ने बोला की शर्त याद रखना | इसका वचन दे दो कि जब कोई उपाय न रह जायेगा सब तरफ से निरूपाय असहाय हो जाओंगे तभी अंतिम घडी में इसे खोलना।
क्योंकि यह सुत्र बडा बहुमूल्य है अगर इसे साधारणतः खोला गया तो यह सूत्र अर्थहीन हो जाएगा।
इसके बाद उन लोगों ने सम्राट को वह अंगूठी दे दी | सम्राट ने अंगुठी पहन ली, वर्षो बीत गये कई बार जिज्ञासा भी हुई पर फिर सम्राट ने सोचा कि कही सूत्र खराब न हो जाए, फिर काफी वर्षो बाद एक युद्ध हुआ जिसमें सम्राट हार गया, और दुश्मन जीत गया। उसके राज्य को हडप लिया गया | वह सम्राट एक घोड़े पर सवार होकर भागा अपनी जान बचाने के लिए राज्य तो गया साथ ही साथ साथी, दोस्त, परिवार सब छुट गये, दो-चार सैनिक और रक्षक उसके साथ थे | वे भी धीरे-धीरे हट गये क्योंकि अब कुछ बचा ही नहीं था तो रक्षा करने का भी कोई सवाल न था।
दुष्मन उस सम्राट का पीछा कर रहा था, तो सम्राट एक पहाडी घाटी से होकर भागा जा रहा था। उसके पीछे घोडों की आवाजें आ रही थी टापे सुनाई दे रही थी। प्राण संकट में थे, अचानक उसने पाया कि रास्ता समाप्त हो गया, आगे तो भयंकर गडा है वह लौट भी नही सकता था, एक पल के लिए सम्राट मोन खड़ा खडा रह गया कि क्या करें ? फिर अचानक उसे अंगूठी की याद आयी, उसके बाद उसने अंगूठी खोली और उसमें से एक छोटा कागज निकाला | उसमें एक छोटा सा वचन लिखा था “यह भी बीत जायेगा”। सुत्र पढ़ते ही उस सम्राट के चेहरे पर मुस्कुराहट आ गयी | उसके चेहरे पर एक बात का खयाल आया सब तो बीत गया, में सम्राट न रहा, मेरा साम्राज्य गया, सुख बीत गया, जब सुख बीत जाता है तो दुख भी स्थिर नहीं हो सकता | शायद सुत्र ठीक कहता हैं, अब करने को कुछ भी नहीं हैं लेकिन सुत्र ने उसके भीतर कोई सोया तार छेंड दिया। यह भी बीत जायेगा ऐसा बोध होते ही जैसे सपना टुट गया। अब वह व्यग्र नहीं, बैचेन नहीं, घबराया हुआ नहीं था। वह शांति से उस पहाड़ की चोटी पर बैठ गया। संयोग की बात थी, थोडी देर तक तो घोडे की टांप सुनायी देती रहीं फिर टांप बंद हो गयी, शायद सैनिक किसी दूसरे रास्ते पर मूड गये। घना जंगल और बिहड पहाड उन्हें पता नहीं चला कि सम्राट किस तरफ गया है | धीरे-धीरे घोडो की टांप दूर हो गयी, अंगुठी उसने वापस पहन ली।
कुछ दिनों बार दोबारा उसने अपने मित्रों को वापस इकठ्ठा कर लिया, फिर उसने वापस अपने दुष्मन पर हमला किया, पुनः जीत हासिल की फिर अपने सिंहासन पर बैठ गया | जब सम्राट अपने सिंहासन पर बैठा तो बडा आनंदित हो रहा था। तभी उसे फिर पुनः उस अंगुठी की याद आयी उसने अंगुठी खोली कागज को पढा फिर मुस्कुराया दोबारा सारा आनन्द विजयी का उल्लास | उसके वजीरों ने पूछा- आप बडे प्रसन्न् थे अब एक दम शांत हो गये क्या हुआ ? सम्राट ने कहा- जब सभी बीत जायेगा, तो इस संसार में न तो दुखी होने पर कुछ है और ना ही सुखी होने पर |
कहानी से मिलती है यह सीख
नेशनल थॉट्स पर प्रकाशित इस कहानी के द्वारा हमने आपको बताया कि जो चीज तुम्हें लगती हैं कि बीत जायेगी उसे याद रखने का कोई मतलब नहीं, अगर आप इस कहानी का यह सूत्र समझ कर जीवन में चलें तो और क्या चाहिए ?  लोग धीरे-धीरे अपने जीवन में उन सभी चीजों को दूर करने लगेंगे जिनसे उन्हें आज भी परेशानी होती है | क्या घमंड, कैसा गर्व, किस बात के लिए अकड़ना अकडना, जब यह सब बीत जाएगा और इसी तरह यह जीवन भी बीत जाएगा |

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