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लाकडाउन : खत्म होने के बाद बेरोजगारी और भुखमरी से कैसे निपटेगी सरकार
The announcement by the Reserve Bank will benefit small businessmen, farmers and the poor
Breaking News Editorial National State

लाकडाउन : खत्म होने के बाद बेरोजगारी और भुखमरी से कैसे निपटेगी सरकार

  • 40 फीसदी लोग बेरोजगारी का शिकार होगें  
  • प्रवासी मजदूर लाक डाउन के बावजूद अपने घर लौट गए
  • वैश्विक महामारी कोरोना वायरस के दोहरी मार ने बाजार को पूरी तरह से बेदम कर दिया

वैश्विक महामारी कोरोना वायरस से निपटने के लिए लागू की गई देशबंदी आर्थिक मंदी के कारण देश के लगभग 40 फीसदी लोग बेरोजगारी का शिकार हो गए हैं। लाक डाउन को प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए केंद्र और राज्य सरकारों की ओर से शुरू की गई समाज कल्याण की योजनाओं के तहत गरीब तबके, दिहाड़ी मजदूर, बेसहारा लोगों और के गांव देहात में रहने वालों को राहत पहुंचाई जा रही है।

हालांकि सरकारी सहायता जरूरतमंदों की संख्या और उनकी मांग की तुलना में ऊंट के मुंह में जीरे के समान है। लेकिन फिर भी जैसे तैसे करके लोग अपना गुज़ारा कर रहे हैं।असली समस्या और परेशानी तो लाक डाउन खत्म होने के बाद पैदा होगी।

लाक डाउन की वजह से महानगर व शहरों में कल कारखाने,व्यापारिक और व्यवसायिक संस्थान बंद हो गए हैं। जिसकी वजह से रोजगार छिन जाने के कारण बड़ी संख्या में प्रवासी मजदूर लाक डाउन के बावजूद अपने घर लौट गए हैं।

लाक डाउन समाप्त होने के बाद जब यह वापस महानगर और शहरों में लौटेंगे तब दुबारा काम न मिलने पर उनकी स्थिति करता होगी।

जानकारों के मुताबिक आर्थिक मंदी और लाक डाउन दोनों की दोहरी मार ने बाजार को पूरी तरह से बेदम कर दिया है। जिससे उबरने में उसे काफी समय लगेगा। इतना ही छोटे और मध्यम दर्जे के उद्यमी व कारोबारी अपना अस्तित्व बचाने के लिए बड़े पैमाने पर खर्चों में कटौती करने के लिए मजबूर हो जाएंगे। ऐसे में उनके पास कमचारियों की छंटनी करने के अलावा दूसरा कोई रास्ता नहीं बचेगा।

इसके साथ ही बड़ी संख्या में बड़ी में प्रवासी मजदूर महानगर और शहरों में छोटे मोटे काम करके अपना व अपने परिवार का भरण-पोषण करते थे। पूंजी खत्म हो जाने के बाद उनके लिए अपने पैरों पर खड़ा करने में भी काफी कठिनाइयों का सामना करना पड़ेगा।

जानकारों के मुताबिक निजी क्षेत्र में भी नौकरियां लगभग 24 फीसदी तक कम हो जाएंगी। इसके साथ ही रियल एस्टेट में भारी गिरावट आने की वजह से निर्माण क्षेत्र पर काफी विपरीत असर पड़ेगा।

जिससे इस क्षेत्र में काम करने वाले मजदूरों व अन्य कमचारियों को बेरोजगारी का सामना करना पड़ेगा।महानगर और शहरों में बेरोजगारी बढ़ने के साथ ही कानून व्यवस्था की स्थिति बिगड़ने के साथ ही अपराध काफी ज्यादा बढ़ जाने की भी आंशका है।

इस सबके मद्देनजर केंद्र व राज्य सरकारों को बाजार को मजबूत करने के लिए पर्याप्त मात्रा में पूंजी की व्यवस्था करने के साथ ही उद्यमियों और कोरोबारियों को हर संभव सहायता मुहैया कराने और करों में छूट देना का फैसला करना होगा।

आलोक गौड़

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