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सोच को बनाएं पाँजिटिव

सकारात्मकता से बढ़कर कोई पुण्य(धर्म) नहीं, और नकारात्मकता से बढ़कर कोई पाप(विधर्म) नहीं”। “सकारात्मकता हमें सबको स्वीकार करने का पाठ पढ़ाती है, वहीं नकारात्मकता अपनों को भी नकार देती है।
“आज की सारी लड़ाई विचारों की है।”
“जन्म-कुण्डलियाँ मिलाना तो फिर भी आसान हो गया है, पर विचारों की कुण्डलीयाँ मिलाना मुश्किल हो गया है।
क्योंकि इंसान की ग्रहकुण्डली में अब शनि,राहू या मंगल हावी नहीं है। उसके केन्द्रग्रह में नकारात्मक सोच का शनि,राहू और केतु हावी है।
कोई अगर पूछे कि मानसिक शांति और तनाव मुक्ति की कीमिया दवा क्या है, तो सीधा सा जवाब होगा- सकारात्मक सोच।

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