शुश्रूषोः श्रद्दधानस्" />
Hindi News, हिंदी समाचार, Samachar, Breaking News, Latest Khabar
Meaning of the word Tirtha: - P Lakshmi Narayan Mishra
Breaking News RELIGION

तीर्थ शब्द का अर्थ :- प लक्ष्मी नारायण मिश्र

शुश्रूषोः श्रद्दधानस्य वासुदेवकथारुचिः।
स्यान्महत्सेवया विप्राः पुण्यतीर्थनिषेबणात् ।।

तो कहा, प्रारम्भ तीर्थयात्रा से करो। पहले ‘तीर्थ’ शब्द का अर्थ भी समझ लो। तीर्थयात्रा माने यह नहीं कि 10000 रु. में चार धाम की यात्रा कर आए। एक बस कर ली और पन्द्रह दिन में सब जगह घूम के आ गए। ऐसी तीर्थयात्रा पर बहुत-से लोग जाते हैं और दो ही चार दिनों में थक कर परेशान हो जाते हैं। फिर होता यह है कि कहते हैं उसको छोड़ दो, वहाँ जाने की जरूरत नहीं है, चलो आगे बढ़ो, आगे बढ़ो इसको छोड़ दिया, उसको छोड़ दिया, फिर भी थक जाते हैं और सोचते हैं कि जितना देख लिया बस उतना ही ठीक है।

सिर्फ फोटो लेते रहते हैं और बाद में फोटो लेते हुए भी थक जाते हैं। बोलते हैं, रेडिमेड मिल जाते हैं उन्हीं को ले लेंगे, क्या-क्या करते रहेंगे। इस प्रकार, वे परेशान हो जाते हैं। अरे भाई ‘तीर्थ’ शब्द का अर्थ है- ‘तरन्ति अनेन इति तीर्थम’। तीर्थ वह है जिसके द्वारा मनुष्य तर जाता है, पार हो जाता है। तीर्थ कोई एक विशेष स्थान ही नहीं होता है। इसलिए असली तीर्थ यदि कोई है तो वह है-

मुद मंगलमय संत समाजू। जो जग जंगम तीरथराजू।।

साधुसमाज, संत लोग ही असली तीर्थ हैं। उनके द्वारा ही हम भवसागर को पार कर सकते हैं। वे तो चलते-फिरते प्रयागराज हैं। कहने का अर्थ यह नहीं कि हृषीकेष आदि तीर्थों में न जाएँ। लेकिन कहा – ‘महत्सेवया’, तीर्थ क्षेत्र में जब जाते हैं तो पहले हमको यह देखना चाहिए कि वहाँ महापुरुष कौन है?

Related posts