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MISSION

National Thoughts

आइये करें ऐसे विश्व का निर्माण

जहां न भय हो, न भूख हो, न भेदभाव हो

सभी समृद्ध हों, सभी स्वस्थ हों

संस्था के उद्देश्य

                                             मूल उद्देश्य:     सभी सुखी हों  सभी समृद्ध हों                                                            

 

इसके लिए  :

1 विश्व में समृद्धि के लिए नारी सशक्तिकरण एवं उनको सम्मान दिलाने के लिए कार्य करना I

2 विश्व में शांति के लिए जात – पात व धर्म के नाम पर भेदभाव मिटाने के लिए कार्य करना I

3 विश्व की पर्यावरण -प्रदूषण व रोज़गार आदि समस्याओं को दूर करने के लिए जनसँख्या नियंत्रित करने के लिए जागरूकता अभियान चलाना I

4 नेपाल – भारत व विश्व की प्रगति के लिए कार्य करना I

5 नेपाल में सीता माता के भव्य मंदिर के निर्माण के लिए कार्य करना I

6 भारत में राधा रानी जी के भव्य मंदिर के निर्माण के लिए कार्य करना I

7 समाज में संस्कार व चरित्र निर्माण के लिए कार्य करना I अधिकार मांगने के साथ ही कर्त्तव्य निभाने का भी संकल्प लेने के लिए प्रेरित करना I

                                 सदस्यता के नियम 

1 कोई चंदा – दान नहीं। अपने घर पर ही एक रुपया प्रतिदिन निकालें और समाज के भले के लिए लगाएं।

2 सुख एवं समृद्धि के लिए नारी का सम्मान करें।

3 एक पत्नी – एक पति व्रत का पालन करें।

4 जनसँख्या सीमित रखने के लिए प्रयास व प्रचार करें I

5 किसी से भी जाति -धर्म -देश के नाम पर भेदभाव न करें।

6 राक्षसी वृत्ति को समाप्त करने के लिए अपने आपको सशक्त व संगठित करें।

7 प्रतिदिन एक व्यक्ति से संस्था के बारे में चर्चा अवश्य करें I सप्ताह में एक घंटा संस्था के उद्देश्यों की पूर्ती के लिए लगाएं। शक्तिशाली बनने के लिए, संगठन के साप्ताहिक कार्यक्रम में हिस्सा लें I

हिन्दू जीवन दर्शन से हमारा तात्पर्य

ॐ सर्वे भवन्तु सुखिनः।-
सर्वे सन्तु निरामयाः।
सर्वे भद्राणि पश्यन्तु।
मा कश्चित् दुःख भाग्भवेत्॥
ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः॥

 

भावार्थ: सभी सुखी होवें, सभी रोगमुक्त रहें, सभी का जीवन मंगलमय बने और कोई भी दुःख का भागी न बने।

ॐ सह नाववतु ।
सह नौ भुनक्तु ।
सह वीर्यं करवावहै ।
तेजस्वि नावधीतमस्तु मा विद्विषावहै ।
ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः ॥

भावार्थ: हे सर्वशक्तिमान ईश्वर! आपकी कृपा, रक्षा और सहाय से हम लोग परस्पर एक दूसरे की रक्षा करें और
हम सब लोग परम प्रीति से मिलके सबसे उत्तम ऐश्वर्य अर्थात चक्रवर्ती राज्य आदि सामग्री से आनंद को
आपके अनुगृह से सदा भोगें I हे कृपानिधि! आपके सहाय से हम लोग एक दूसरे के सामर्थ्य को पुरुषार्थ से
सदा बढ़ाते रहें I हे प्रकाशमय सब विद्या के देने वाले परमेश्वर ! आपके सामर्थ्य से ही हम लोगों का पढ़ा –
पढ़ाया सब संसार में प्रकाश को प्राप्त हो I हे प्रीति के उत्पादक! आप ऐसी कृपा कीजिए कि जिससे हम लोग
परस्पर विरोध कभी न करें, किन्तु एक दूसरे के मित्र होके सदा बर्ते I

सदस्यता के नियम

1. कोई चंदा या दान नहीं लिया जाता। केवल रुपया 1/- प्रति वर्ष के अलावा। 

2. सदस्य बनने के लिए संस्था के उद्देस्य से सहमत होना आवश्यक है। 

3. किसी भी देश धर्म, संप्रदाय, वर्ग का व्यक्ति सदस्य बन सकता है।