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Mother's Aanchal on which shade: - National Thoughts Special
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मां के आंचल की जिस पर छाया :- National Thoughts Special

मां के आंचल की जिस पर छाया
समझो ईश्वर का उसपे साया है

आओ गीत गुनगुना ले मंच के तत्वावधान में मां की महिमा पर एक डिजिटल कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया जिसकी अध्यक्षता हरिद्वार से पधारे वरिष्ठ गीतकार श्री बृजेंद्र हर्ष ने की। मुख्य अतिथि रहे गाजियाबाद से पधारे कविवर अनिमेष शर्मा जी, विशिष्ट अतिथि थे गाजियाबाद से पधारे गीतकार डॉ राजीव पांडे जी, सानिध्य पानीपत से पधारे गजल कार श्री अनुपिन्दरसिंह अनूप का रहा। संचालन रहा कविवर संजय जैन का।
मथुरा से पधारे कवियत्री अंजना अंजुम की सरस्वती वंदना से कवि सम्मेलन का शुभारंभ हुआ।
अध्यक्ष श्री बिजेन्द्र हर्ष के मां पर पड़े इस मुक्तक ने सभी की वाहवाही लूटी:-

मां के आंचल की जिस पर छाया है
समझो ईश्वर का उसपे साया है
रोज माँ माँ पुकारता है जो
उसने उत्तम नसीब पाया है

अनिमेश जी के शेर खूब दाद पाई:-

मिली सबसे अधिक औलाद से जो
उसी अवहेलना का नाम है मां

डॉक्टर राकेश पांडे जी के इस गीत में सभी को मंत्रमुग्ध कर दिया:-

रोम-रोम रोमांचित करता सांसो का आधार
मां है मेरे आस-पास कहीं मां है मेरे आस-पास
अनुपिन्दरसिंह अनूप जी के इस दोहे ने सभी का दिल जीत लिया:-

मां मंदिर में आरती मस्जिद की अजान
मत समझो तो कुछ नहीं समझो तो भगवान
गीतकार डा. जयसिंह आर्य के गीत ने सभी का मन मोह लिया:-

बच्चे की किलकारी पर तो सौ सौ लॉर्ड लुटाती मां
जब तक लाल नहीं सो जाता लोरी उसे सुनाती मां

माँ पर सुनाई अपनी रचनाओं से जिन कवियों- कवयित्री ने वाहवाही लूटी उनमें प्रमुख हैं सर्वश्री
विनय प्रतापसिंह रूड़की, अजय जयहरि राजस्थान, सुरेन्द्र खास दिल्ली, प्रदीप मायूस शामली, सूरजसिंह कोलकाता, सुश्री अंजना अंजुम मथुरा, रेखा पूनिया स्नेहिल दिल्ली,
पूनम रजा हरिद्वार

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