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माँ का रूप और विधाता की पहचान

एक समय की बात है, एक बच्चे का जन्म होने वाला था।

 जन्म से कुछ क्षण पहले वह भगवान से पूछता है।

मैं इतना छोटा हूँ खुद से कुछ कर भी नहीं पाता, भला धरती पर मैं कैसे रहूँगा।

 कृपया मुझे अपने पास ही रहने दीजिये, मैं कहीं नहीं जाना चाहता हूँ ।

भगवान बोले,  मेरे पास बहुत से फ़रिश्ते हैं  उन्ही में से एक मैंने तुम्हारे लिए चुन लिया है।

वो तुम्हारा बोहत ख़याल रखेगा तुम्हें बहुत प्यार करेगा।

पर आप मुझे बताइए, यहाँ स्वर्ग में मैं कुछ नहीं करता बस गाता और मुस्कुराता हूँ।

मेरे लिए खुश रहने के लिए इतना ही बहुत है।

तुम्हारा फ़रिश्ता तुम्हारे लिए गायेगा और हर रोज़ तुम्हारे लिए मुस्कुराएगा भी तुम्हारे लिए जागेगा भी।

और तुम उसका प्रेम महसूस करोगे और खुश रहोगे।

जब वहां लोग मुझसे बात करेंगे तो मैं समझूंगा कैसे, मुझे तो उनकी भाषा नहीं आती ?

तुम्हारा फ़रिश्ता तुमसे सबसे मधुर और प्यारे शब्दों में बात करेगा।

ऐसे शब्द जो तुमने यहाँ भी नहीं सुने होंगे।

 बड़े धैर्य और सावधानी के साथ तुम्हारा फ़रिश्ता तुम्हे बोलना भी सीखाएगा तुम्हें चलना भी सिखागा। 

 जब मुझे आपसे बात करनी हो तो मैं क्या करूँगा?

तुम्हारा फ़रिश्ता तुम्हे हाथ जोड़ कर प्रार्थना करना सीखाएगा, और इस तरह तुम मुझसे बात कर सकोगे।

मैंने सुना है कि धरती पर बुरे लोग भी होते हैं।  उनसे मुझे कौन बचाएगा ?

तुम्हारा फ़रिश्ता तुम्हे बचाएगा, भले ही उसकी अपनी जान पर खतरा क्यों ना आ जाए।

लेकिन मैं हमेशा दुखी रहूँगा क्योंकि मैं आपको नहीं देख पाऊंगा।”

तुम इसकी चिंता मत करो।

तुम्हारा फ़रिश्ता हमेशा तुमसे मेरे बारे में बात करेगा।

तुम्हें बताएगा कि तुम वापस मेरे पास कैसे आ सकते हो।

उस वक़्त स्वर्ग में असीम शांति थी। 

पर पृथ्वी से किसी के कराहने की आवाज़ आ रही थी।

बच्चा समझ गया कि अब उसे जाना है।

उसने रोते-रोते भगवान से  पूछा- हे ईश्वर अब तो मैं जाने वाला हूँ।

 कृपया मुझे उस फ़रिश्ते का नाम बता दीजिये ?

भगवान बोले,  फ़रिश्ते के नाम का कोई महत्त्व नहीं है।

बस इतना जानो कि तुम उसे “माँ” कह कर पुकारोगे।

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