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गुरु- गुरुवा और सद्गुरु की पहचान कैसे करे?
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स्वर्वेद घर मे रखने का महत्व – विहंगम योग संस्थान सूरत

जब वर्ष 2018 में भादो जन्म जयन्ती गया में मनाई जा रहीथी। वहां प्रवचन पंडाल के पास मेरी ड्यूटी दी गई थी।मैं प्रवचन पंडाल के पास ही 15 दिनों से सुबह से शाम तक रहता था।कार्यकर्म प्रारम्भ होने के दिन छपरा के गुरुभाई बहन आ गए उनमे ब्रम्हा बाबू संजोजक भुनेश्वर बाबू बरिष्ठ गुरु भाई उमाशंकर बाबू महात्मा महतो जी एवं अन्य गुरुभाई लोग पधारे इनलोगो से पुरानी जान पहचान थी।छपरा संत समाज को लिट्टी चोखा काउंटर खोलना था ।सो उनलोगों को जगह दिखाया तथा स्टोर से सामग्री दिलवाया। जब निश्चिन्त हो गए तो रात में हम लोगों की बैठकी लगी।भुनेश्वर बाबू से बात चीत का सिलसिला चल निकला। इसी बीच मैन भुनेश्वर बाबू से पूछा कि आप तो बीच मे सुना कि दिल्ली प्रचार कार्य मे चले गए थे ।तो उन्होंने कहा की हां मिश्रा जी मैं गया था।तो मैने उनसे कुछ अनुभव सुनाने को कहा उसी पर वे एक संस्मरण सुनाए जो काफी रोचक था।मैं उसी कहानी को आपलोगो के समछ रख रहा हूँ। वे बताये की एक दिन मैं दो तीन लोगों के साथ हाथ मे स्वर्वेद लेकर एक मुस्लिम मोहल्ले से होकर गुजर रहा था ।

अपने दरवाजे पर दो तीन मुस्लिम महिला बैठी थी। जब उनके सामने से होकर जा रहे थे तो स्वर्वेद में ऊपर के जिल्द पर स्वामी जी के तस्वीर के चारों ओर चमकने वाले पदार्थ का घेरा बना था जिससे सूर्य का प्रकाश प्रवर्तित होकर उन मुस्लिम महिलाओं के आंखों पर पड़ी ।इनलोगों को इसका पता भी नही था। जब ये लोग उनलोगों से कुछ कदम आगे बढ़े तो उन महिला में से एक महिला इनलोगों को पुकारी ये लोग उन महिलाओं के पास गए और पूछे कि क्यों बुलाये।महिला बोली हाथ मे जो किताब लिए हैं वो किनका किताब है ।तब ये लोग बोले ये मेरे गुरु जी का लिखा किताब है।तब महिला बोली क्या ये किताब मुझे देंगे।इनलोगों ने कहा आप ये किताब लेकर क्या करेंगे।

उसपर बोली मुझे काम है ।ये लोग तो प्रचार के लिए निकले ही थे सो पुस्तक को दाम लेकर दे दिए।और वापस आ गए। दूसरे दिन पुनः उसी रास्ते से ये लोग हाथ मे स्वर्वेद लेकर जा रहे थे। वहां पर महिलाएं लगता है इंहिलोगों का बेसब्री से इंतजार कर रही थी। इनको देखते ही बोली आप आ गए कितना पुस्तक आज लाये हैं। इनलोगों ने कहा कि एक ही लाया हूँ तो उनलोग बोली कि मुझे दस पुस्तक चाहिए और अभी ही लेकर दे देते तो अच्छा था। इनलोगों को आश्चर्य हुआ कि इतनी पुस्तक की मांग ये महिला क्यों कर रही है ना तो ये महिलाएं उपदेश ली है और ना ही कभी स्वर्वेद पढ़ी है । फिर एकाएक इतनी किताब की मांग कर रही है। बात को जानने समझने के लिए भुनेश्वर बाबू वहीं रुक गए और दूसरे गुरुभाई को स्वर्वेद लाने के लिए भेज दिए।जब वे लोग पुस्तक लाने चले गए तब भुनेस्वर बाबू बोले अब बताइए क्या कारण से आपलोग इतना पुस्तक ले रहे हैं।इसपर महिला बोलने लगी हम सभी परिवार जिन्न से बहुत परेशान हैं। Latest News In hindi

हमलोगों का जीवन नरक बना हुआ है। समझ मे नही आ रहा है कि उससे कैसे छुटकारा मिलेगा। कल जब आप इधर से गुजर रहे थे तो उस पुस्तक पर सूर्य की रोशनी परी ओर वही रोशनी लॉट कर हमलोग के आंख पर पड़ी तो आएसा लगा कि इस पुस्तक से ओ भाग जाएगा। यही समझ कर हमने उस पुस्तक को खरीदा ओर घर धोकर पवित्र जगह पर रख दिया। जब रात हुई तो महसूस हुआ कि मकान के खिड़की पर कोई कह रहा है कैसे जाएं घर के अंदर ये तो कहाँ से ये किताब रख दी है घर के अंदर जाने में बन ही नही रह है। रात भर घर के बाहर ही छटपटाता रहा पर घर मे घुसने का साहस नही कर सका। सुबह जब ये बात अपने गोतिया भाई को बताया तो ओ सब भी इस पुस्तक की मांग करने लगे। इसी कारण से हमलोग आप लोगों का इंतजार कर रही थी।

हमलोग को ये पुस्तक तो दे ही दीजिए और ये बताइए क्या हमलोग भी इस संस्था से जुड़ सकते हैं। इसपर भुनेस्वर बाबू बोले क्यों नही ।आप लोग उपदेश लेकर साधन करें तो बहुत लाभ होगा ।वे सभी महिलाएं बाद में भुनेश्वर बाबू के साथ गयी और दिल्ली आश्रम पर उपदेश ली। तो ये है स्वामी सदाफल देव जी महाराज द्वारा रचित स्वर्वेद महाग्रंथ की महिमा जिनके उपस्थिति मात्र से बुरा आत्मा अस्थान छोड़कर भागने पर मजबूर हो जाता है।बोलिए सादगुरु सदफ़लदेव जी महाराज की जय।ये छोटा सा संस्मरण कमलेश मिश्रा की ओर से आप सभी गुरु भाई बहनों के लिए। Breaking News in india

 

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