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National Thoughts Special :- गुरू पूर्णिमा पर समर्पित एक गीत

गुरू पूर्णिमा के अवसर पर सभी गुरुओं समर्पित एक गीत

गीत

आन गुरू जी शान गुरू जी।

शिष्यों के पहचान गुरू जी।।

जग में मेरा कुछ भि नहीं है।

सब तुम्हरा वरदान गुरू जी।।

आन गुरू जी…………..…….

जब भी छाई घोर निराशा।

तुमने मुझमें भर दी आशा।।

बातों ही बातों में तुमने।

सिखलाई थी हमको भाषा।।

इस दुनिया से था अनजाना।

तुमने कराया भान गुरू जी।।

आन गुरू जी…………..…….

शब्दों से पहचान कराया।

लिखना पढ़ना सब सिखलाया।।

धरती पर थे पाँव हमारे।

चाँद पे जिसको है पहुंंचाया।।

करती है ये दुनिया सारी।

चरणों के गुणगान गुरू जी।।

आन गुरू जी…………..…….

बाधाओं को पार कराना।

आगे अपने कदम बढ़ाना।।

नदियाँँ हो या पर्वत कोई।

शिखरों पर है चढ़ते जाना।।

शिष्यों को सम्मानित करके।

पा लेते सम्मान गुरू जी।।

आन गुरू जी…………..…….

वेद पुराणों के हैं ज्ञाता।

आपहि अर्जुन के निर्माता।।

इतिहासों से हमने जानांं।

गुरुओं के गौरव की गाथा।।

चरणों में हैं बैठे आकर।

धरती पर भगवान गुरू जी।।

आन गुरू जी…………..…….

 

हरेन्द्र प्रसाद यादव “फ़क़ीर” ✍️

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