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बेइंतेहा यातनाओं के बाद भी नापाक मंसूबों को नहीं मिली कामयाबी

जब भी भारत पाकिस्तान के संबंधों की बात होती तो जहन में अतीत में गुज़रे कुछ खास घटनाएं आकस्मिक ही ज़हन में कौंधने लगते है। 26 जुलाई भारत के इतिहास में कारगिल युद्ध के नाम से दर्ज है। इस दिन भारतीय सेना के 527 जवान वीरगति को प्राप्त हुए थे एवं  1363 जवान घायल  हुए थे। आज का दिन देश के वीर जवानों के नाम समर्पित है जिन्होने देश की आन बान और शान के लिए अपने प्राणों की आहुति तक दे दी। बात कारगिल की हो और कैप्टन सौरभ कालिया का जिक्र न हो तो इतिहास अधूरा प्रतीत होता है।हिमाचल प्रदेश के पालमपुर के रहने वाले सौरभ कालिया भारतीय सेना के वह जांबाज ऑफिसर थे। उनके साहस और सहनशक्ति का लौहा पाकिस्तान के नापाक मंसूबों के आगे बौना साबित हुआ।

कारगिल युद्ध में पाकिस्तान के हत्थे चढ़े घायल कैप्टन सौरभ कालिया के साथ ज्यादतियों की इंतेहा की गई। बावजूद इसके सौरभ कालिया ने अदम्य साहस का परिचय देते हुए अपने जिस्म के हर अंग को भारत के नाम सुपुर्द कर खुद अपना अस्तित्व खत्म कर लिया।मई के पहले दो सप्ताह बीत जाने के बाद  15 मई को खुफिया सूचना मिली कि पाकिस्तानी घुसपैठिये भारतीय सीमा की ओर बढ़ रहे हैं। पहले तो सौरभ को लगा कि उन्हें मिला इनपुट गलत हो सकता है, लेकिन दुश्मन की हलचल ने अपने होने पर मुहर लगा दी। पहले से तैयार घुसपैठियों ने उन्हें और उनकी टीम को चारों तरफ से घेर लिया बावजूद इसके उनका ज़ज्बा सभी हथियारों पर भारी पड़ रहा था। उन्होंने सबसे पहले दुश्मन की सूचना अपने आला अधिकारियों को दी। फिर अपनी टीम के साथ तय किया कि वह आखिरी सांस तक सामना करेंगे। गोलाबारी में सौरभ और उनके साथी बुरी तरह ज़ख्मी हो गये थे। लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी।


लगातार हुए हमले से कैप्टन जख्मी हो गए। जख्मी होने के कारण पाकिस्तानी घुसपैठियों ने सौरभ कालिया को बंदी बना लिया। दुश्मन सौरभ और उनके साथियों से भारतीय सेना की खुफिया जानकारी जानना चाहता था। इसलिए उसने लगभग 22 दिनों तक अपनी हिरासत में रखा। लाख कोशिशों के बावजूद कैप्टन सौरभ ने कोई जानकारी नहीं दी। इस पर उन्हें यातनाएं दी जाने लगीं। अंतर्राष्ट्रीय कानूनों की धज्जियां उड़ाते हुए सौरभ कालिया के कानों को गर्म लोहे की रॉड से छेदा गया। उनकी आंखें निकाल ली गईं। हड्डियां भी तोड़ दी। अन्य तरह से भी कष्ट दिए। लेकिन सौरभ का हौसला नहीं टूटा। अंत में उन्होंने सर्वोच्च बलिदान दिया। कैप्टन सौरभ कालिया के बिना जैसे कारगिल का युद्ध अधूरा है ठीक उसी तरह भारतीय सेना में शामिल इस रियल हीरो की लिस्ट भी अधूरी है इसलिए पूरा भारतवर्ष इन्हें रियल हीरो मानता है।

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