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Negligence of states and benefit of insurance companies, loss to farmers due to PM crop insurance scheme
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राज्यों की लापरवाही और बीमा कंपनियों का फायदा, पीएम फसल बीमा योजना से हो रहा किसानों को नुकसान

प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना जोकि किसानों के हितों के लिए बनाई गई थी | आज इस योजना में हुई धांधली को लेकर एक बड़ी खबर सामने आ रही है | खबर है की इस योजना को लेकर 19 राज्यों की बड़ी लापरवाही सामने आई है | केंद्र ने बीमा के लिए अपने हिस्से का पैसा जमा कर दिया | किसानों के बैंक अकाउंट से उनके हिस्से का प्रीमियम कट गया  लेकिन कई राज्यों ने उसमें अपना प्रीमियम नहीं दिया | नतीजा बीमा करवाने के बावजूद कुछ राज्यों में किसानों को प्राकृतिक आपदा से खराब हुई फसल के मुआवजे के लिए दर-दर भटकना पड़ सकता है |

केंद्रीय कृषि मंत्रालय से मिली एक्सक्लूसिव जानकारी के मुताबिक 9 जुलाई तक फसल बीमा की 1894.07 करोड़ रुपये की स्टेट प्रीमियम सब्सिडी बकाया है | यह पैसा भी साल 2018-19 और 2019-20 का है | राज्य सरकार को वह पैसा कंपनियों को देना होगा | तब जाकर कहीं आसानी से किसानों को मुआवजा मिलेगा | दरअसल, बीमा कंपनियां तो पैसा कमाने के लिए खेती-किसानी के मैदान में उतरीं हैं | इसलिए उन्हें किसान से अधिक अपने मुनाफे की पड़ी रहती है और उनके प्रतिनिधि किसी न किसी बहाने क्लेम देने में आनाकानी करते हैं |

ऐसे में जब राज्यों की ओर से उनका प्रीमियम जमा नहीं होता तो कंपनियों को क्लेम न देने का अच्छा मौका मिल जाता है |यानी किसान संकट में आ जाता है और कंपनियां की मौज हो जाती है | प्रीमियम सब्सिडी न जमा करने वाले राज्यों में राजस्थान, गुजरात, हरियाणा, झारखंड, मध्य प्रदेश, यूपी और तेलंगाना आदि शामिल हैं |

फसल बीमा योजना में कौन करता है जमा राशि 

  • पीएम फसल बीमा योजना में प्रीमियम के तीन हिस्से होते है | 
  • जिसे किसान, केंद्र सरकार और राज्य मिलकर जमा करते हैं |
  • किसानों को खरीफ फसलों के लिए कुल प्रीमियम का अधिकतम 2 फीसदी देना होता है |
  • रबी की खाद्य एवं तिलहन फसलों के लिए 1.5 फीसदी लगता है |
  • कमर्शियल व बागवानी फसलों के लिए कुल प्रीमियम का 5 फीसदी भुगतान करना होता है | 
  • प्रीमियम की शेष रकम ‘प्रीमियम सब्सिडी’ के रूप में केंद्र और राज्य सरकार मिलकर देती हैं |
  • मैदानी राज्यों में यह हिस्सा 50-50 फीसदी का होता है |
  • पूर्वोत्तर राज्यों में प्रीमियम सब्सिडी का 90 फीसदी हिस्सा केंद्र और 10 फीसदी स्टेट को देना होता है |
 

किसानों ने कितना प्रीमियम दिया
केंद्रीय कृषि मंत्रालय की एक रिपोर्ट के मुताबिक 2018-19 में 576.8 लाख किसानों ने फसल बीमा लिया | उन्होंने अपने हिस्से के प्रीमियम के रूप में 4,853 करोड़ रुपये विभिन्न बीमा कंपनियों में जमा किया | जबकि 2019-20 में 611.3 लाख किसानों ने बीमा करवाया, जबकि उन्होंने 4,419 करोड़ रुपये का प्रीमियम भरा |

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