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Never ignore three things in the desire for success
Never ignore three things in the desire for success
Motivational

सफलता की चाह में तीन बातों को न करें कभी नज़र अंदाज

सफलता पाने के लिए हम और आप खूब मेहनत करते है। दिन रात एक कर अपने लक्ष्य को साधने का प्रयास करते है। कई बार हम लक्ष्य के बेहद करीब होते है लेकिन अगले ही पल उससे कोसों दूर हो जाते है। सफलता को पाते-पाते उससे दूर हो जाना अंदर से तोड़ने का काम करता है लेकिन इसमें भी कोई दो राय नहीं है कि हर असफलता हमें सफलता के करीब ले जाती है। सफलता पाने के लिए जीवन में जिन बातों को अपनाना चाहिए, उससे कहीं ज्यादा जरूरी है कि कुछ बातों को अपने जीवन से निकालना।  सफलता को पाने के लिए ऐसी कई बातें है, जिन्हें अक्सर अनदेखा कर दिया जाता है, जबकि उन बातों को सही तरह से समझकर ही सफलता प्राप्त की जा सकती है।

सफलता क्या है?

क्या सफलता किसी उद्देश्य की प्राप्ति है या फिर आत्म संतुष्टि। कई बार हम अपने उद्देश्य की प्राप्ति के लिए इतने लालयित रहते है कि आत्मचिंतन की तरफ ध्यान ही नहीं देते। जैसे राह चलते हमारे सामने ऐसी कई घटनाओं को महसूस करते है जिनमें हमारा एक सार्थक योगदान हो सकता है लेकिन केवल हमें अपना लक्ष्य सबसे जरूरी लगता है इसलिए हम किसी और बात के बारे में सोचना  नहीं चाहते। और ऐसा करने मात्र से हम अपना वो सब खोने लगते है जिसे हम रात दिन की कड़ी मेहनत से पाना चाहते है। उदाहरण के लिए  आप कहीं काम से जा रहे हैं, ऐसे में आपके सामने कोई एक्सीडेंट हो जाता है और आप अपने कार्यों को महत्व देते हुए उस घायल व्यक्ति की मदद नहीं करते।  ऐसा करके आप उस वक्त तो अपने कार्य को कर लेंगे लेकिन धीरे-धीरे आत्मग्लानिता में घिरकर आप अपना आत्मविश्वास खोने लग जाएंगे।  सही मायनों में सफलता का अर्थ बेहतर इंसान बनने से भी है। आपको कुछ बनने के लिए सबसे पहले इंसान बने रहना होगा। इसलिए लक्ष्य की प्राप्ति के लिए मानवता के पाठ को कभी नहीं भूलना चाहिए।

 घर बाहर में संतुलन की आवश्यकता

लक्ष्य की प्राप्ति के लिए जरूरी है दिलों दिमाग में अपने लक्ष्य को आत्मसात करना। आप जीवन में क्या पाना चाहते हैं, इस बात को ध्यान में रखने के साथ आपको उस चीज को पाने के लिए पूरी तरह समर्पित हो जाना चाहिए। जिसके बिना लक्ष्य को पाना नामुमकिन ही है। जैसे आप कामयाबी चाहते है लेकिन उस कामयाबी के चक्कर में आपने ऑफिस में खुद को आत्मसात तो कर लिया लेकिन घर-परिवार से दूर होते गए। ऐसे में अगर आपको आपकी मेहनत से कोई अच्छा मुकाम मिल भी जाता है तो आपकी फैमिली का बीता हुआ वह कम कभी वापस नहीं आएगा जो उन्हें आपके साथ बिताने थे। कामयाबी का तात्पर्य मात्र बहुत बड़ी पॉजिशन न होकर कामयाब व्यक्तित्व से होती है जो घर और बाहर में संतुलन रखते हुए अपने काम के प्रति समर्पित होना है। बहुत से लोग मेहनत तो करते हैं लेकिन लक्ष्य को पाने के लिए उनमें समर्पण भाव नहीं होता।  इस बात को सबसे ज्यादा नजरअंदाज किया जाता है।

भावुकता

भावुकता एक ऐसा शब्द है, जो आपको सफल बनाने के साथ असफल भी बना सकता है।  आपको अपनी भावनाओं को नियंत्रित करते हुए अपने कर्मों पर ध्यान देना चाहिए। जैसे, महाभारत में अर्जुन के साथ, जिन भावनाओं को हृदय की उदारता या महानता मानकर अर्जुन धर्मयुद्ध से विमुख हो रहे थे, वह भावनाओं का असंतुलन ही था। गीता के माध्यम से श्रीकृष्ण ने अर्जुन को इसे नियंत्रित रखते हुए कर्म करने का ज्ञान दिया।

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