विश्व की महानतम दार्शनिकों वैस" />
Hindi News, हिंदी समाचार, Samachar, Breaking News, Latest Khabar
Not everyone has physical strength, but anything can be won by using the power of intelligence.
Breaking News Motivational

शारीरिक बल हर किसी के पास नहीं लेकिन बुद्धि बल का उपयोग कर कुछ भी जीता जा सकता है

विश्व की महानतम दार्शनिकों वैसे एक सुकरात के बारे में आपने सुना ही होगा, उनसे जुड़ी एक कहानी आज आपको बताने जा रहे हैं | जो कि जीवन में तो काम आएगी और ज्ञान की प्राप्ति भी होगी | सुकरात एक महान दार्शनिक होने के साथ-साथ एक अच्छे इंसान भी थे | एक बार वे अपने शिष्यों के साथ बैठे कुछ चर्चा कर रहे थे। चर्चा में वे लोग ज्ञान की बातें ही कर रहे थे | तभी वहां अजीबो-गरीब वस्त्र पहने एक ज्योतिषी आ पहुंचा। वह सबका ध्यान अपनी ओर आकर्षित करते हुए बोला ,” मैं ज्ञानी हूँ | मैं किसी का चेहरा देखकर उसका चरित्र बता सकता हूँ। बताओ तुममें से कौन मेरी इस विद्या को परखना चाहेगा?”
सभी शिष्य सुकरात की तरफ देखने लगे। सुकरात ने उस ज्योतिषी से अपने बारे में बताने के लिए कहा।
अब वह ज्योतिषी उन्हें ध्यान से देखने लगा। सुकरात बहुत बड़े ज्ञानी तो थे लेकिन देखने में बड़े सामान्य थे, साधारण से वस्त्र धारण किया करते थे | ज्योतिषी उन्हें कुछ देर निहारने के बाद बोला,” तुम्हारे चेहरे की बनावट बताती है कि तुम सत्ता के विरोधी हो , तुम्हारे अंदर द्रोह करने की भावना प्रबल है। तुम्हारी आँखों के बीच पड़ी सिकुड़न तुम्हारे अत्यंत क्रोधी होने का प्रमाण देती है | ज्योतिषी ने अभी इतना ही कहा था कि वहां बैठे शिष्य अपने गुरु के बारे में ये बातें सुनकर गुस्से में आ गए और उस ज्योतिषी को तुरंत वहां से जाने के लिए कहा। पर सुकरात ने उन्हें शांत करते हुए ज्योतिषी को अपनी बात पूर्ण करने के लिए कहा।
ज्योतिषी बोला ,” तुम्हारा बेडौल सिर और माथे से पता चलता है कि तुम एक लालची ज्योतिषी हो और तुम्हारी ठुड्डी की बनावट तुम्हारे सनकी होने के तरफ इशारा करती है।”
इतना सुनकर शिष्य और भी क्रोधित हो गए पर इसके उलट सुकरात प्रसन्न हो गए और ज्योतिषी को इनाम देकर विदा किया। शिष्य सुकरात के इस व्यवहार से आश्चर्य में पड़ गए और उनसे पूछा ,” गुरूजी , आपने उस ज्योतिषी को इनाम क्यों दिया, जबकि उसने जो कुछ भी कहाँ वो सब गलत है ? उन्होंने बहुत शांत स्वर में कहा नहीं पुत्रों, ज्योतिषी ने जो कुछ भी कहा वो सब सच है ,उसके बताये सारे दोष मुझमें हैं | मुझे लालच है , क्रोध है , और उसने जो कुछ भी कहा वो सब है , पर वह एक बहुत ज़रूरी बात बताना भूल गया , उसने सिर्फ बाहरी चीजें देखीं पर मेरे अंदर के विवेक को नही आंक पाया | जिसके बल पर मैं इन सारी बुराइयों को अपने वष में किये रहता हूँ , बस वह यहीं चूक गया, वह मेरे बुद्धि के बल को नहीं समझ पाया | सुकरात ने अपनी बात सिद्ध की |
 
कहानी से मिली सीख
इस कहानी से हमें यह सीख मिलती है कि बड़े-बड़े लोगों में भी कमियां होती हैं लेकिन वह इनसे छुटकारा पाने में कामयाब हो जाते हैं | तो हम ऐसा क्यों नहीं कर सकते | इंसान को अंदरूनी तौर पर मन साफ रखना चाहिए | इसके बाद वे किसी भी चीज पर विजय प्राप्त कर सकता है |

Related posts

Leave a Comment