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Question marks on employment, large degrees and peons will be formed
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रोजगार पर सवालियां निशान, बड़ी-बड़ी डिग्री और चपरासी बनेगें जनाब

एक ज़माना था जब किसी व्यक्ति की काबिलियत उसकी पढ़ाई और उसके डिग्री के इर्द-गिर्द घूमती थी। डॉक्टर की पढ़ाई करने वाले पेशे से डॉक्टर और इंजीनियरिंग की पढ़ाई करने वाले इंजीनियर बनते थे। लेकिन मौजूदा हालात इन बातों को दरकिनार कर डिग्री कोई और पेशा कोई की नीति फॉलो कर रहे है। काम में क्या है कोई भी कर लेगें पर क्या यह उचित है कि अपनी ज़िदंगी को डॉक्टरी, इंजीनियरिंग और अन्य किसी फील्ड के लिए तैयार कर रहे युवा कलर्क और प्यून जैसी नौकरियों के लिए आवेदन कर उसे करने पर मजबूर हो।

  • जाहिर है इंजीनियरिंग कर रहे छात्र अपने उज्जवल भविष्य के लिए कड़ी मेहनत कर उस डिग्री के लिए खुद को तैयार करते है जिसका सपना देश का हर तीसरा व्यक्ति देखता है पर चाह कर भी उसे पा नहीं सकता।
  • ठीक यही हाल डॉक्टरी की पढ़ाई कर रहें युवाओं के साथ भी है लेकिन आश्चर्य तब होता है जब बड़ी-बड़ी डिग्री लिए यह लोग 8वीं और 10वीं पास सरकारी नौकरी के लिए आवेदन करते है।
  • हाल ही में हुई नियुक्ति प्रक्रिया में सात डॉक्टरों और लगभग 450 इंजीनियरों ने प्यून की नौकरी स्वीकार कर ली है। ऐसी खबरें जहाँ अंतर्मन में कौतुहल पैदा करते है वहीं देश की मौजूदा अर्थव्यवस्था और दशा को भी दर्शाते है।
हाल ही में गुजरात हाई कोर्ट और अधीनस्थ अदालतों में चपरासी सहित वर्ग-4 के कुल 1149 पदों को भरने के लिए निकाली गई जिसके लिए 1,59,278 लोगों ने आवेदन किया। आंकड़े चौकाने वाले है कि 1,59,278 लोगों में से 44,958 स्नातक डिग्री लिए युवा है। इस आवेदन के लिए 7 डॉक्टरों, 450 इंजीनियरों और 543 स्नातकों ने वर्ग-4 की नौकरी स्वीकार की है। इन्हें 30 हजार रुपये वेतन मिलेगा। ऐसी खबरें देश में रोजगार जैसी समस्या और मेक इन इंडिया, स्किल इंडिया जैसे दावों और वादों की पोल खोलने के लिए पर्याप्त है।

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