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Railway Board should forgive the license fee and electricity bill of stalls on railway platform: Ravindra Gupta
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रेलवे प्लेटफार्म पर स्टॉल के लाइसेंस फीस, बिजली का बिल माफ करे रेलवे बोर्ड : रविंद्र गुप्ता 

कोरोना काल में बुरी हालत से गुजर रहे वेंडर

कोरोनावायरस संक्रमण की दूसरी लहर अब थमने लगी है, लेकिन लोगों के मन में डर अब भी बरकरार है | हम यह चीज तो अच्छे से जानते हैं कि कोरोना काल में ऑक्सीजन एक्सप्रेस द्वारा कितनों की जान बचाई गई है | लेकिन इस बीच हम यह भूल गए हैं कि रेलवे स्टेशन के प्लेटफार्म पर स्टॉल लगाने वाले या वेंडर का कितना बुरा हाल है | राजधानी दिल्ली में कोरोना संक्रमण के कारण 25 फीसदी ही ट्रेनें प्लेटफॉर्म पर चल रही हैं, जिसमें भी आधे से भी कम यात्री जा रहे हैं|

एक तरफ ट्रेनों की समस्या तो दूसरी तरफ रोजी रोटी का संकट | राजधानी दिल्ली के मुख्य रेलवे स्टेशनों की बात करें तो जहां प्रतिदिन हजारों ट्रेन स्टेशन पर आती थी | वहां, हालत अब ऐसे है की दिन मे एक या दो ट्रेन भी आ जाए तो बहुत है | रेल्वे अधिकारियों के मुताबिक अभी दिल्ली में पहले के मुकाबले काम ट्रेन चल रही है | जिसमें ज्यादातर गाड़ियां खाली जा रही है | स्टेशन वेंडर्स की हालत इसीलिए भी खराब है कि लोग कोरोना वायरस संक्रमण के डर से कुछ खरीदना नहीं चाहते या लोगों के मन में यह शंका रहती है, कि कहीं वे इस कारण संक्रमण की चपेट में ना आ जाए |


ट्रेनों के कम संचालन होने से ज्यादातर वेंडरों की आमदनी रुक गई है | प्रवीण शर्मा एक वेंडर
 है वह बताते है कि लाइसेंस फीस, बिजली का बिल, पानी का किराया और जो लोग उनके यहां काम करते थे उनकी सैलरी का खर्च | स्टॉल पर काम पर रखने से पहले सब कर्मचारियों का मेडिकल व पुलिस सत्यापन होता है | उन्हे कैसे हटाए | इसलिए अधिकांश कर्मचारियों को वेंडर संचालक अपनी जेब से पैसा दे रहे है | यही सब कारण है कि वेंडरों के सामने भूखे रहने की स्थिति बन रही है | दिल्ली के अलग-अलग स्टेशन परिसरों में कुल मिलाकर 500 स्टार्स है, जिनमें किसी ना किसी तरीके से 5000 से ज्यादा लोग इनसे जुड़े हैं | हालात तब खराब होते हैं जब कई स्टेशनों पर दिन भर में सिर्फ एक ही ट्रेन होती है और वह भी खाली जाए तो क्या करें | दिल्ली की ऐसे कई रेलवे स्टेशन में जैसे शहादरा, शकूरबस्ती समेत ऐसे कई ओर स्टेशन है जिन पर कोरोना काल में सिर्फ एक ही ट्रेन आती है |

इनकी परेशानियां यहां खत्म नहीं होती | रेलवे परिसर द्वारा घोषणा की जा रही है कि घर से ही अपना खाना लेकर आएं ताकि इस संक्रमण को फैलने से रोक जाए | इस कारण लोग सामान लेने में परहेज करते हैं | अखिल भारतीय रेलवे खान-पान लाइसेंस वेलफेयर एसोसिएशन के अध्यक्ष श्री रविंद्र गुप्ता जी बताते हैं कि, वेंडर्स भूखे मरने की कगार पर है | लाइसेंस फीस, बिजली बिल व कई अन्य चीजों को माफ करने को लेकर उन्होंने रेलवे बोर्ड को एक पत्र लिखा है | जिसमें वेंडरो के सामने आ रही परेशानियों का उल्लेख किया गया है | अगर ऐसी ही स्थिति बनी रही तो लोगों का जीवन यापन मुश्किल हो जाएगा |

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