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एंटीबॉडी किट खरीदने में हुआ करोड़ों रुपए का घोटाला

भारतीय राजदूत की मदद से चीन से आयात की गई किट सरकार को तीन गुना अधिक कीमत पर बेची। सरकार मामला दबाने की कोशिश में जुटी।जहां एक ओर पूरा देश कोरोना वायरस के संकट से निपटने के लिए हर संभव प्रयास कर रहा है। कोरोना के संकमण को फैलने से रोकने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से देश भर में तीन मई तक लाक डाउन लागू करने की घोषणा का पालन करते हुए देश में हर तरह की गतिविधियां बंद हैं। जिनकी वजह से न केवल देश की अर्थव्यवस्था बुरी तरह से डगमगा रही है बल्कि करोड़ों लोगों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।

संकट की इस भीषण घड़ी में भी स्थिति का लाभ उठा कर सरकार को करोड़ों रुपए का चूना लगाने का एक हैरतअंगेज मामला सामने आया है।हैरानी की बात तो यह है कि कोरोना के संदिग्ध मरीजों की जांच करने के लिए आवश्यक ऐंटीबाडी टेस्टिंग किट न केवल चीन में भारत के राजदूत की मदद से खरीदी गईं बल्कि उनकी गुणवत्ता भी घटिया किस्म की थी। जिसकी वजह से इनको मंगवाने का मकसद भी विफल हो गया।

प्राप्त जानकारी के मुताबिक चीन की वांडफो कंपनी से भारत की मेडरिक्स और रीयल मेटाबलिक्स कंपनियों ने ऐंटीबाड़ी टेस्टिंग किट आयात की थी। इन दोनों को यह किट भारत में हर तरह के खर्चे मिला कर 245 रूपए की पड़ी थी। जबकि इन दोनों कंपनियों ने ऐसी पांच लाख किट भारत सरकार को 600 प्रति किट कीमत पर बेच दीं इन कंपनियों से किट खरीदने वाली सरकारी संस्था ने किट खरीदने से पहले न तो चीन में भारत के राजदूत से इनकी वास्तविक कीमत जानने की कोशिश की और न ही इनकी गुणवत्ता की जांच करवाने का कष्ट ही उठाया। बाद में राजस्थान सरकार ने इनकी गुणवत्ता पर सवालिया निशान लगाते हुए इनके इस्तेमाल पर रोक लगा दी।

इसी प्रकार असम राज्य ने भी इनका उपयोग करने से इन्कार कर दिया। इंडियन कौंसिल आफ मेडिकल रिसर्च (आईसीएमआर) ने इन किट की गुणवत्ता के बारे में राज्य सरकारों की आपत्तियों को सही मानते हुए सभी किट की जांच पूरी होने तक इनके इस्तेमाल पर रोक लगा दी है।
अगर किट बेचने वाली चीन की वांडफो कंपनी और भारत में आयात करने वाली कंपनियों के बीच इनकी गुणवत्ता को लेकर विवाद पैदा न होता तो शायद यह घोटाला कभी भी सामने आता ही नहीं।अभी भी जइंडियन कौंसिल आफ मेडिकल रिसर्च (आईसीएमआर) की ओर से इस पर जिस प्रकार से इस पर लीपापोती करने की कोशिश की जा रही है उससे तो ऐसा ही लगता है कि इसके तार काफी ऊपर तक जुड़े हुए हैं। अगर निष्पक्ष जांच कराई गई तो बहुत सारे चेहरे सामने आ सकते हैं। इसे देखते हुए तो यही लगता है कि समय के साथ ही इसे भी ठंडे बस्ते में डाल दिया जाएगा।

आलोक गौड़

 

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