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गहरी साज़िश की बू आ रही है

अपने दामन पर लगे दाग को मिटाने के लिए भाजपा दूसरों पर दंगे भड़काने का आरोप लगा रही है। केजरीवाल के हाथों चुनावी जंग में पिटने के वाले मोदी और शाह दिल्ली सरकार को बर्खास्त कर राष्ट्रपति शासन भी लगा सकते हैं।

आलोक गौड़

 

देश की राजधानी दिल्ली के उत्तर पूर्वी जिले में भड़के हिंसक दंगों में तीन दर्जन से भी ज्यादा लोग मारे जा चुके हैं और लगभग 200 से भी अधिक लोगों का अस्पताल में इलाज चल रहा है। यह दंगे जिस सुनियोजित तरीके से भड़के और तीन दिनों तक प्रधान सेवक से लेकर उनके सिपहसालार व पुलिस प्रशासन सोते रहे, उससे इन दंगों के पीछे बहुत बड़ी साज़िश की बू आ रही है।

साज़िश की आशंका को इस बात से भी बल मिलता है कि दिल्ली उच्च न्यायालय के जिस जस्टिस मुरलीधर ने पुलिस को मोदी सरकार के मंत्री अनुराग ठाकुर, सांसद प्रवेश साहिब सिंह वर्मा और भाजपा नेता कपिल मिश्रा के खिलाफ शांति भंग करने के लिए भड़काऊ भाषण देने के आरोप में 24 घंटे के भीतर ही एफआईआर दर्ज करने का आदेश दिया था। उन्होनें सरकारी वकील तुषार मेहता को कड़ी फटकार लगाने के साथ ही दिल्ली पुलिस पर लापरवाहीपूर्ण रवैये पर भी कड़ी नाराज़गी जताई थी।

जस्टिस मुरलीधर के इस आदेश का पालन होना तो दूर बल्कि इस मामले की सुनवाई से उन्हें दूर करने के लिए रातों-रात उनका तबादला करवा दिया गया। जैसे कि उम्मीद थी दिल्ली उच्च नयायालय ने इस मामले की सुनवाई करते हुए इसे 13 अप्रैल तक के लिए टाल दिया है। उसी दिन पुलिस उच्च न्यायालय में अपनी रिपोर्ट दाखिल कर यह बताएगी की भड़काऊ भाषण देने वाले नेताओं के खिलाफ क्या कार्यवाही की गई है।

इसी बीच की मंत्रियों ने हिंसक दंगे भड़काने के मामले को लेकर कांग्रेस और दिल्ली सरकार खासकर आम आदमी पार्टी के संयोजक अरविंद केजरीवाल के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। इतना ही नहीं पुलिस ने आम आदमी पार्टी के खजूरी वार्ड से निगम पार्षद ताहिर हुसैन के घर पर छापा मारकर भारी मात्रआ में तेजाब, पेट्रोल, बम, पत्थर व अन्य साजो समान बरामद करने का दावा किया है। यह बात किसी को बताने की जरूरत नहीं है कि दिल्ली पुलिस किसके अधीन है और किसके इशारों पर काम कर रही है।

जो केन्द्र सरकार अपनी पार्टी के नेताओं के खिलाफ एफआईआर दर्ज होने से रोकने के लिए न्यापालिका से भी खिलवाड़ करने से बाज़ नहीं आ रही है। वह अपने विरोधियों को बदनाम करने के लिए किसी भी हद तक जा सकती है। इस लिए सर्वोच्च न्यायालय की समिति की सिफारिश पर दिल्ली उच्च न्यायालय के जस्टिस मुरलीधर और पुलिस द्वारा आम आदमी पार्टी के निगम पार्षद के खिलाफ की गई कार्यवाई को लेकर लोग केन्द्र सरकार की नीयत पर शक कर रहे है।

खुफिया सूत्रों के मुताबिक दिल्ली विधानसभा के चुनाव जीतने के लिए हर तरह का हथकंडा अपनाने और पूरी ताकत झौंकने के बावजूद दिल्ली में भाजपा का दो दशक से भी ज्यादा समय से चल रहा राजनीतिक वनवास खत्म करवाने में विफल रहने वाले प्रधान सेवक व उनके सिपहसालार उस हार को पचा नहीं पाए हैं। अब उत्तर-पूर्वी दिल्ली में भड़के दंगों को वह आम आदमी पार्टी की साज़िश बता कर दिल्ली में निर्वाचित सरकार को बर्खास्त कर राष

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