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Some of his precious words on Sant Ravidas ji's birth anniversary
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संत रविदास जी की जयंती पर उनके कहे कुछ अनमोल वचन

आप सभी को रविदास जयंती की हार्दिक शुभकामनाएं | हर साल माघ महीने की पूर्णिमा तिथि पर संत रविदास जयंती मनाई जाती है। इस बार संत रविदास जयंती 27 फरवरी को है। इस दिन इनके अनुयाई पवित्र नदी में स्नान करते हैं। भजन-कीर्तन और रविदास जी के दोहे गाते हैं। इस दिन इनके जन्म स्थान पर इनके बहुत सारे भक्त पहुंचते हैं और इस दिन को उत्सव की तरह मनाते हैं। जूते बनाने का काम इनका पैतृक व्यवसाय था। ये जूते बनाते समय इतने मग्न हो जाते थे जैसे स्वयं भगवान के लिए बना रहे हो। संत रविदास जी एक ऐसे व्यक्ति थे जिन्होंने भगवान की भक्ति में समर्पित होने के साथ अपने सामाजिक और पारिवारिक कर्त्तव्यों का भी बखूबी निर्वहन किया। इन्होंने लोगों को बिना भेदभाव के आपस में प्रेम करने की शिक्षा दी, और इसी तरह से वे भक्ति के मार्ग पर चलकर संत रविदास कहलाए। उनकी शिक्षाएं आज भी प्रेरणादायक हैं। तो चलिए उनकी जयंती पर जानते हैं उनके कुछ अनमोल वचन…

  • संत रविदास कहा करते थे, “मन चंगा तो कठौती में गंगा”। इसका अर्थ यह है कि मन अच्छा है तो कठौती में ही गंगा अवतरित हो सकती हैं। 
  • रविदास जन्म के कारनै, होत न कोउ नीच। नकर कूं नीच करि डारी है, ओछे करम की कीच।।इसका अर्थ है कि ‘कोई भी व्यक्ति छोटा या बड़ा अपने जन्म के कारण नहीं बल्कि अपने कर्म के कारण होता है। व्यक्ति के कर्म ही उसे ऊंचा या नीचा बनाते हैं। संत रविदास जी सभी को एक समान भाव से रहने की शिक्षा देते थे।
  • करम बंधन में बन्ध रहियो, फल की ना तज्जियो आस | कर्म मानुष का धर्म हैसत् भाखै रविदास || कर्म हमारा धर्म है और फल हमारा सौभाग्य। इसलिए हमें हमेशा कर्म करते रहना चाहिए और कर्म से हमारी पहचान होनी चाहिए |

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