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विश्व जनसंख्या दिवस पर करें देश निर्माण में सहयोग

देश में दिनों के आधार पर कई तरह के दिन तैयार कर उससे संबंधित खुशियों से आगाह किया जाता है जिसका मकसद ज़िदंगी को और अधिक खूबसूरत बनाना होता है। इस कड़ी में मदर्स डे, फादर डे, वेलेंटाइन डे, एनवायरनमेंट डे, डॉटर्स डे आदि शामिल है। लेकिन इन सब से जुदा है वर्ल्ड पॉपुलेशन डे। क्योंकि इसे मनाने का उद्देश्य पॉपुलेशन को बढ़ावा देना कतई नहीं है। इस दिन को मनाने का उद्देश्य दुनियाभर में बढ़ती जनसंख्या के प्रति लोगों को जागरुक करना है ताकि विस्फोटक होती जनसंख्या को काबू किया जा सकें। जनसंख्या के लिहाज़ से चीन के बाद भारत दूसरे नम्बर पर है, हमारे देश में गरीबी, अशिक्षा, कुपोषण और बाल मृत्यु दर, की दशा किसी से छुपी नहीं है। भारत जैसे देश में इस दिन परिवार नियोजन, लैंगिक समानता, मानवाधिकार और मातृत्व स्वास्थ्य के बारे में जानकारी दी जाती है।  इस दिन विभिन्न कार्यक्रमों का आयोजन होता है जिनमें  बढ़ती जनसंख्या से होने वाले दुष्परिणामों पर प्रकाश डाला जाता है और साथ ही लोगों को जागरूक किया जाता है, क्योंकि जनसंख्या पर नियंत्रण रखना जरूरी है। विषय में पहली बार 11 जुलाई 1989 से ही विश्व जनसंख्या दिवस मनाया गया था।    

 
अब तक आबादी के लिहाज़ से विश्व स्तर पर पहले स्थान पर कायम चीन को 2027 के तक पीछे छोड़ते हुए भारत दुनिया में सबसे ज्यादा जनसंख्या वाला देश बन सकता है। भारत की जनसंख्या में 2050 तक 27.3 करोड़ की वृद्धि हो सकती है। इसके साथ ही भारत शताब्दी के अंत तक दुनिया में सबसे अधिक जनसंख्या वाला देश बना रह सकता है। यह दावा संयुक्त राष्ट्र के आर्थिक और सामाजिक मामलों के विभाग के ‘पॉपुलेशन डिविजन’ ने ‘द वर्ल्ड पॉपुलेशन प्रोस्पेक्ट 2019 में प्रकाशित किया है। रिपोर्ट में कहा गया है कि 2050 तक जनसंख्या में जितनी वैश्विक वृद्धि होगी उनसे में से आधी वृद्धि भारत, नाइजीरिया, पाकिस्तान, डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो, इथियोपिया, तंजानिया, इंडोनेशिया, मिस्र और अमेरिका में होने की अनुमान है। ‘द वर्ल्ड पॉपुलेशन प्रॉस्पेक्ट्स 2019 : हाईलाइट्स’ शीर्षक वाली अध्यन रिपोर्ट में कहा गया है कि अगले 30 सालों में दुनिया की आबादी दो अरब तक बढ़ कर मौजूदा 7.7 अरब से 2050 तक 9.7 अरब हो सकती है। यह वैश्विक जनसांख्यकी पैटर्न और संभावनाओं का एक व्यापक परिदृश्य मुहैया कराती है। 
 
तेजी से विकास की ओर बढ़ते भारत के लिए बढ़ती जनसंख्या किसी अभिशाप से कम नहीं है। हमारे देश में लगभग 75% समस्याओं की एकमात्र जड़ जनसंख्या का विस्फोटक होना है। चाहे बात स्वास्थ्य की हो या रोजगार की। संसाधनों का उपलब्धता जनसंख्या के आगे बेबस हो जाती है। जरूरत है बेहतर समाज के निर्माण के लिए जनसंख्या पर नियंत्रण और इससे संबंधित विषयों पर अधिक से अधिक जागरूकता की। नेशनल थॉट्स ने भी समाज निर्माण अपनी भूमिका निभाते हुए समाज को बढ़ती जनसंख्या और इसके प्रभाव के प्रति लोगों को जागरूक करने के लिए एक मुहीम शुरू की जिसके तहत हम जनता से पूछ रहे है कि “शेर का एक चाहिए या सूअर के बारह।” 
 
 
 

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