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टैक्सापेयर्स को मिली नोटिस का लगाया जा सकता है पता असली है या नकली : भूषण पांडेय 

नेशनल थॉट्स डेस्क।  अकसर इनकम टैक्स डिपार्मेंट की ओर से टैक्सपेयर्स को नोटिस जारी किया जाता है। बता दें कि कई बार नोटिस के असली या फर्जी होने का पता लगाना मुश्किल होता हैं। लेकिन अब केन्द्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड ने एक खास सुविधा की शुरुआत की है। दरअसल, सीबीडीटी का दस्तावेज पहचान संख्या यानी डीआईएन नंबर शुरु हो चुका है।  वहीं इसके बाद अब सीबीडीटी करदाताओं को डीआईएन के साथ ही नोटिस जारी करेगा। इसका मतलब यह है कि कंप्यूटर जनरेटेड डीआईएन के बिना आयकर विभाग की ओर से नोटिस, लेटर, आदेश या समन या अन्य किसी भी तरह का कम्युनिकेशन अमान्य माना जाएगा। बता दें कि वहीं इसका कानूनी तौर पर भी कोई अस्तित्व नहीं होगा।

कंप्यूटर जनरेटेड डीआईएन के बारे में बताते  हुए राजस्व सचिव अजय भूषण पांडेय ने बताया कि सिर्फ विशेष परिस्थितियों को छोड़कर हर तरह का कम्युनिकेशन डीआईएन की सहायता से ही होगा।  पांडे ने आगे कहा कि अगर इसके बिना किसी तरह की बातचीत करने की जरूरत हुई तो इसके लिए आयकर विभाग के चीफ कमिश्नर या डायरेक्टर जनरल से लिखित में अनुमति लेनी पड़ेगी।  इसके बिना किसी भी तरह के कम्युनिकेशन को अवैध करार दिया जाएगा।

वहीं डीआईएन सिस्टम वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के निर्देशन में तैयार किया गया है।  वहीं इस सिस्टम को 1 अक्टूबर को लॉन्च किया गया और पहले ही दिन 17,500 नंबर जनरेट किए गए। कम्युनिकेशन का एक रिकॉर्ड दर्ज होगा। सीबीडीटी की ओर से यह बताया गया है कि टैक्सपेयर्स और डिपार्टमेंट के बीच होने वाले ऑनलाइन कम्‍युनिकेशन को 15 दिन के भीतर आईटी डिपार्टमेंट के पोर्टल पर अपलोड करना होगा।  दोनों के कम्युनिकेशन पर डीआईएन नंबर का इस्तेमाल होगा।  वहीं इससे हर कम्युनिकेशन का एक रिकॉर्ड दर्ज होगा।  इसके बिना किसी भी तरह का कम्युनिकेशन गलत माना जाएगा।

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