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The shard of the fourth phase of the lockdown will blow over the heads of the states
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लाक डाउन के चौथे चरण का ठीकरा राज्यों के सिर पर फूटेगा

सड़क पर दम तोड़ने वाले मजदूरों के बारे में प्रधानमंत्री मोदी ने एक शब्द भी नहीं कहा।कोरोना संकट से निपटने के लिए लागू किए गए लाक डाउन के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को एक बार फिर से देशवासियों को संबोधित किया। उन्होंने अपने संबोधन में लाक डाउन की अवधि बढ़ाने की ओर इशारा करते हुए कहा कि इसकी रूपरेखा राज्यों के मुख्यमंत्रियों के साथ हुई बातचीत और उनकी ओर से दी गई जानकारी पर आधारित होगी। इसका मतलब यह है कि लाक डाउन की अवधि बढ़ाने और इस दौरान ढील देने की वजह से कोरोना के फैलने का ठीकरा राज्यों के सिर पर फोड़ा जाएगा।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने 35 मिनट के भाषण के में लाक डाउन के तीसरे चरण में बेरोजगारी और भुखमरी का शिकार होने की वजह से हजारों किलोमीटर पैदल चलकर अपने घर लौटने की कोशिश कर रहे लाखों प्रवासी मजदूरों के बारे में एक शब्द तक नहीं कहा। यही नहीं घर लौटने की कोशिश में रेल की पटरी, सड़क दुघर्टना और अन्य कारणों से रास्ते में दम तोड़ने वाले 380 लोगों की मौत पर भी संवेदना तक जाहिर नहीं की। इससे लगता है कि उन्हें प्रवासी मजदूरों की बदहाली और उनके परिजनों सहित घर लौटने की कोशिश करने जैसे मामलों की कोई चिंता नहीं है।

अपने संबोधन में उन्होंने देश को आत्मनिर्भर बनाने पर जोर देते हुए इसके लिए 20 लाख करोड़ रुपए का पैकेज देने की घोषणा की। इसमें पहले ही दिए गए 1.70 लाख करोड़ रूपए के आर्थिक पैकेज के साथ ही रिजर्व बैंक की ओर से बैंकों व अन्य वित्तीय संस्थाओं को दी गई राशि भी शामिल है।उन्होंने कहा कि भारत के लोगों ने कोरोना की आपदा को भी अवसर बना लिया है। पता नहीं यह कहते समय उनका इशारा किन की ओर था। क्या वह उन लोगों की बात कर रहे थे जो संकट की इस घड़ी में भी सभी वस्तुओं की कालाबाजारी कर भारी मुनाफा कमा कर अपनी तिजोरी भर रहे हैं।

या फिर वह उन उद्यमी और कारोबारियों का जिक्र कर रहे थे, जिन्होंने संकट की इस घड़ी में सरकार के आदेशों के बावजूद अपने कर्मचारियों को बिना वेतन दिए नौकरी से निकाल कर उन्हें सड़कों पर मरने के लिए छोड़ दिया है।प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारत को आत्मनिर्भर बनाने के लिए पांच सूत्री मंत्र भी दिया। जिसमें पहला सूत्र देश की अर्थव्यवस्था को तेजी से आगे बढ़ाने का है। उन्होंने कहा कि अर्थव्यवस्था की सिर्फ रफ्तार ही नहीं बढ़ानी होगी बल्कि क्वांनटम जंप भी लगाना होगा।

दूसरे नंबर पर उन्होंने बुनियादी ढांचे को रखते हुए कहा कि देश में इस तरह का ढांचा खड़ा किया जो आधुनिक होने के साथ ही भारत को आगे बढ़ाने का काम करे। इसके बाद उन्होंने सिस्टम को रखा और कहा कि हमें ऐसा सिस्टम बनाना होगा जो 21 वीं सदी के सपनों को साकार करे। चौथे सूत्र के तौर पर उन्होंने डेमोग्राफी का जिक्र करते हुए कहा कि हमारा देश दुनिया का सबसे ज्यादा युवा देश है। ऐसे में यह ही हमारी ऊर्जा का स्रोत है और यह देश को आगे बढ़ाएगा।

अंतिम सूत्र के रूप में उन्होंने ने मांग का जिक्र करते हुए कहा कि भारत दुनिया के लिए एक बाजार के साथ साथ बड़ी मांग का क्षेत्र है। इसका सही इस्तेमाल करने की जरूरत है।‌उन्होंने स्थानीय वस्तुओं का उपयोग करने पर जोर देते हुए इसके पक्ष में अपनी आवाज मुखर करने की अपील भी की।उन्होंने यह भी कहा कि हम कोरोना से लड़ेंगे और आगे भी बढ़ेंगे।

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